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बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों को 941 लाख रुपये का पारिश्रमिक भुगतान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर ग्रामोद्योग विभाग की पहल, बुनकरों और महिलाओं को रोजगार व आर्थिक सशक्तिकरण का मिल रहा लाभ

चमन प्रकाश केयर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों के आर्थिक विकास तथा रोजगार को बढ़ावा देने के लिए ग्रामोद्योग विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेंद्र यादव के निर्देश पर ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक श्री राजेश सिंह राणा (IAS) के मार्गदर्शन में प्रदेश के बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों को पारिश्रमिक भुगतान किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश की बुनकर सहकारी समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को कुल 941 लाख रुपये (9 करोड़ 41 लाख रुपये) का पारिश्रमिक भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में RTGS के माध्यम से हस्तांतरित किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 26 जिलों की 302 बुनकर सहकारी समितियों को 760 लाख रुपये, 3 नवनिर्मित बुनकर सहकारी समितियों को 150 लाख रुपये तथा 128 महिला स्व-सहायता समूहों को 31 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। इस प्रकार कुल 941 लाख रुपये की राशि संबंधित हितग्राहियों के बैंक खातों में अंतरित की गई है।

बुनकरों और महिला समूहों को लगातार मिल रहा आर्थिक सहयोग

राज्य हाथकरघा संघ द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3 नवंबर 2026 तक प्रदेश की 345 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई पारिश्रमिक के रूप में 5487 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। वहीं, 2005 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 2117 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई है।

इसके अतिरिक्त, कर्तव्य निर्वहन के दौरान बुनकरों की आकस्मिक मृत्यु होने पर उनके आश्रित परिवारों को आर्थिक सहायता के रूप में 5 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। हाथकरघा क्षेत्र के 11 हितग्राहियों को कुल 3.74 लाख रुपये की राशि भी आर्थिक सहायता के रूप में प्रदान की गई है।

इस प्रकार बुनकर सहकारी समितियों, महिला स्व-सहायता समूहों एवं अन्य हितग्राहियों को कुल 7315.54 लाख रुपये (73 करोड़ 15 लाख 54 हजार रुपये) का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में RTGS के माध्यम से हस्तांतरित किया गया है।

स्थानीय रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेंद्र यादव के निर्देश पर ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक श्री राजेश सिंह राणा के मार्गदर्शन में राज्य के बुनकरों को बुनाई कार्य तथा महिला स्व-सहायता समूहों को गणवेश सिलाई कार्य के माध्यम से स्थानीय स्तर पर निरंतर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

ग्रामोद्योग विभाग द्वारा बुनकरों और महिला समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनके पारिश्रमिक का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने, पारंपरिक हाथकरघा उद्योग को प्रोत्साहन मिलने और बुनकर परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।

‘लोकल फॉर वोकल’ को मिल रहा प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप ‘लोकल फॉर वोकल’ की अवधारणा को सार्थक बनाने के लिए ग्रामोद्योग विभाग द्वारा सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। बुनकरों एवं सिलाई कार्य से जुड़े महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहित कर स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

ग्रामोद्योग विभाग का उद्देश्य बुनकरों, कारीगरों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार के स्थायी अवसर उपलब्ध कराना, उनकी आय में वृद्धि करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। विभाग के इन प्रयासों से प्रदेश में हाथकरघा उद्योग को नई दिशा मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और समृद्धि के अवसर बढ़ रहे हैं।

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