ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा की अनोखी पहल ‘लोकल फॉर वोकल’ को बढ़ावा देने बैठकों में खादी और हाथकरघा वस्त्र पहनना होगा अनिवार्य, अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए जारी हुए निर्देश

बुनकरों, कारीगरों और महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की पहल; ‘वोकल फॉर लोकल’ को मिलेगा बढ़ावा
चमन प्रकाश केयर (कुर्रे)
रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्थानीय हाथकरघा, खादी और पारंपरिक कोसा वस्त्रों को बढ़ावा देने के लिए ग्रामोद्योग विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री की मंशा और ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेन्द्र यादव के निर्देशानुसार विभागीय बैठकों, शासकीय कार्यक्रमों एवं आधिकारिक आयोजनों में अधिकारियों और कर्मचारियों को हाथकरघा, खादी तथा छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा एवं कॉटन वस्त्र धारण करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव-सह-संचालक एवं प्रबंध संचालक श्री राजेश सिंह राणा, आईएएस ने 12 अक्टूबर 2026 को निर्देश जारी किए।

जारी निर्देशों के तहत ग्रामोद्योग विभाग के अधीन हाथकरघा, रेशम, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, माटीकला बोर्ड तथा छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ मर्यादित, रायपुर से संबंधित विभागीय बैठकों और आधिकारिक आयोजनों में स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्त्रों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही राज्य, संभाग, जिला एवं विकासखंड स्तर के कार्यालयों में प्रत्येक सप्ताह एक दिन अधिकारियों-कर्मचारियों को हाथकरघा एवं खादी ग्रामोद्योग के परिधान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बाजार, कारीगरों को मिलेगा सम्मान
इस पहल का उद्देश्य प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ एवं ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आह्वान को धरातल पर उतारना है। स्थानीय बुनकरों और कारीगरों द्वारा तैयार वस्त्रों के उपयोग एवं बिक्री को बढ़ावा मिलने से उनके उत्पादों के लिए बाजार का विस्तार होगा। साथ ही, सिलाई कार्य से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों को भी रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
विभाग का मानना है कि शासकीय बैठकों और कार्यक्रमों में स्थानीय उत्पादों को अपनाने से आम नागरिकों के बीच हाथकरघा एवं खादी वस्त्रों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। इससे प्रदेश की पारंपरिक बुनाई कला को पहचान मिलने के साथ बुनकरों और कारीगरों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
‘कौशल फेब हैंडलूम’ ब्रांड की भी हुई शुरुआत

स्थानीय हाथकरघा उत्पादों को प्रोत्साहित करने की दिशा में विभाग द्वारा राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस, 7 अगस्त 2026 के अवसर पर ‘कौशल फेब हैंडलूम’ प्रीमियम ब्रांड का शुभारंभ भी किया गया था। इस पहल का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में उत्पादित पारंपरिक वस्त्रों को बेहतर पहचान एवं विपणन के अवसर उपलब्ध कराना है।
शासन की योजना हाथकरघा बिलासा शोरूम और खादी भंडार में उपलब्ध कोसा एवं कॉटन वस्त्रों के प्रति आम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने तथा उनकी बिक्री को प्रोत्साहित करने की है। इससे प्रदेश के पारंपरिक बुनकरों द्वारा निर्मित वस्त्रों को बाजार उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने में सहायता मिलने की संभावना है।
79 बुनकर समितियों को 2.39 करोड़ रुपये का भुगतान
बुनकरों को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए ग्रामोद्योग विभाग द्वारा भुगतान एवं सहायता की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सितंबर 2026 में प्रदेश की 79 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई पारिश्रमिक के रूप में कुल 2.39 करोड़ रुपये की राशि आरटीजीएस के माध्यम से उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की गई।
इसके अलावा, राज्य के 10 अवार्डी बुनकरों को मासिक आर्थिक सहायता योजना के अंतर्गत 50 हजार रुपये की मासिक सहायता जारी की गई है।
आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में पहल
ग्रामोद्योग विभाग की इन पहलों का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध हाथकरघा परंपरा को संरक्षित करना, स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ाना तथा बुनकरों, कारीगरों और सिलाई कार्य से जुड़ी महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों का विस्तार करना है।
सरकारी आयोजनों में स्थानीय वस्त्रों को प्रोत्साहन देने, प्रीमियम ब्रांड के माध्यम से उत्पादों की पहचान मजबूत करने और बुनकर समितियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने जैसे प्रयासों से ‘वोकल फॉर लोकल’ की अवधारणा को बढ़ावा मिल रहा है। इससे छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला को सम्मान मिलने के साथ स्थानीय कारीगरों की आर्थिक एवं सामाजिक सुदृढ़ता का मार्ग भी प्रशस्त होने की उम्मीद है।



