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बस्तर के जंगलों में माओवादियों के हथियार डंप पर सुरक्षा बलों की बड़ी चोट

नारायणपुर में 10 राइफल, 13 जिंदा बीजीएल शेल और 16 कारतूस बरामद, तीन जिलों में लगातार सामने आ रहे पुराने हथियार डंप

चमन प्रकाश केयर (कुर्रे)

नारायणपुर। बस्तर संभाग में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। जंगलों में माओवादियों द्वारा लंबे समय से छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटक सामग्री की तलाश में चलाए जा रहे सर्चिंग अभियान के दौरान नारायणपुर जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। अबूझमाड़ क्षेत्र के जंगलों में चलाए गए अभियान में जवानों ने एक पुराने माओवादी हथियार डंप का पता लगाकर बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की है। बरामद सामग्री में 10 राइफल, 13 जिंदा बीजीएल शेल, 16 कारतूस तथा अन्य माओवादी सामग्री शामिल है।

सुरक्षा बलों को जंगल के अंदर माओवादियों द्वारा हथियार और अन्य सामान छिपाकर रखे जाने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने संबंधित क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान शुरू किया। जंगल का इलाका बेहद संवेदनशील होने के कारण जवानों ने सावधानीपूर्वक आगे बढ़ते हुए संभावित स्थानों की जांच की। इसी दौरान पुराने डंप का पता चला। तलाशी लेने पर वहां हथियारों और विस्फोटक सामग्री का जखीरा मिला।

जंगल में छिपाकर रखे गए थे हथियार

पुलिस के मुताबिक माओवादी संगठन सुरक्षा बलों से बचने के लिए जंगलों के अंदर अलग-अलग स्थानों पर हथियार, कारतूस और विस्फोटक सामग्री छिपाकर रखते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हीं डंप का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे हथियार डंप की बरामदगी से माओवादी संगठन की गतिविधियों और हथियारों की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ता है।

नारायणपुर में मिले इस डंप से बरामद 10 राइफल और 13 जिंदा बीजीएल शेल सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण बरामदगी मानी जा रही है। इसके अलावा 16 कारतूस तथा अन्य सामग्री भी बरामद हुई है। जवानों ने बरामद सामान को अपने कब्जे में लेकर नियमानुसार आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

31 मार्च के बाद पांच बड़े डंप का खुलासा

बस्तर के जंगलों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे अभियान के दौरान पिछले कुछ समय में माओवादियों के पुराने हथियार डंप लगातार सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार 31 मार्च के बाद बस्तर के जंगलों में पांच बड़े हथियार डंप बरामद किए जा चुके हैं। इन डंप से हथियारों के साथ-साथ बड़ी मात्रा में विस्फोटक और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद हुई है।

12 मई 2026 को नारायणपुर जिले में हुई कार्रवाई में जंगल से करीब 1.01 करोड़ रुपये नकद, 88 राइफल, 132 बीजीएल शेल, डेटोनेटर और कॉर्डेक्स वायर बरामद किए गए थे। इतनी बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक मिलने से सुरक्षा बलों को माओवादी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण सफलता मिली थी।

इसके बाद 13 मई 2026 को बीजापुर जिले में भी माओवादी डंप का पता लगाया गया। यहां से करीब 65.52 लाख रुपये नकद, 32 हथियार, कारतूस और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। वहीं 3 मई 2026 को दंतेवाड़ा में भी सुरक्षा बलों को माओवादी हथियार डंप बरामद करने में सफलता मिली थी।

अबूझमाड़ में सर्चिंग अभियान और तेज

नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। दुर्गम और घने जंगलों वाले इस इलाके में माओवादी गतिविधियों को देखते हुए जवानों द्वारा लगातार सर्चिंग की जा रही है। अभियान का उद्देश्य जंगलों में छिपे माओवादी ठिकानों, हथियार डंप और अन्य संदिग्ध स्थानों का पता लगाना है।

सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से माओवादी संगठनों के पुराने ठिकानों और हथियारों के भंडार सामने आ रहे हैं। एक के बाद एक हथियार डंप मिलने से यह भी स्पष्ट हो रहा है कि जंगलों में लंबे समय से छिपाकर रखी गई सामग्री अब सुरक्षा बलों की निगरानी और सर्च ऑपरेशन की जद में आ रही है।

हथियार डंप मिलने से माओवादी नेटवर्क को झटका

सुरक्षा बलों की कार्रवाई केवल हथियारों की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि जंगलों में माओवादी नेटवर्क की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों को कमजोर करने की दिशा में भी इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हथियारों और विस्फोटक सामग्री की बरामदगी से माओवादियों की हिंसक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाले संसाधनों पर असर पड़ता है।

नारायणपुर में हुई ताजा बरामदगी के बाद सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में सर्चिंग और निगरानी को और मजबूत कर दिया है। जंगलों में छिपे अन्य संभावित डंप और ठिकानों की तलाश जारी है। बस्तर के तीन जिलों में लगातार सामने आ रहे हथियार डंप यह संकेत दे रहे हैं कि सुरक्षा बलों का अभियान अब जंगलों के भीतर माओवादी नेटवर्क के उन ठिकानों तक पहुंच रहा है, जहां लंबे समय से हथियार और विस्फोटक छिपाकर रखे गए थे।

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