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सुकमा में पुनर्वास की नई इबारत: प्रभारी सचिव राजेश सिंह राणा ने पुनर्वासित युवाओं के साथ बैठकर किया भोजन, 20 युवाओं को 5G स्मार्टफोन देकर संचार क्रांति से जोड़ा; कोसा से सिल्क, हथकरघा और आधुनिक सिलाई का प्रशिक्षण शुरू

चमन प्रकाश केयर (कुर्रे)

सुकमा। पुनर्वास का मतलब केवल किसी व्यक्ति को मुख्यधारा में वापस लाना नहीं, बल्कि उसे सम्मान के साथ आगे बढ़ने, अपने पैरों पर खड़े होने और भविष्य संवारने का अवसर देना है। सुकमा में मंगलवार को शासन की इसी सोच की एक मानवीय और प्रभावी तस्वीर देखने को मिली। छत्तीसगढ़ शासन के खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के सचिव एवं सुकमा जिले के प्रभारी सचिव राजेश सिंह राणा ने पुनर्वासित युवाओं के बीच पहुंचकर न केवल उनकी समस्याएं और आकांक्षाएं सुनीं, बल्कि उनके साथ बैठकर भोजन किया। इसी दौरान 20 पुनर्वासित युवाओं को 5G स्मार्टफोन वितरित कर उन्हें डिजिटल दुनिया से जोड़ा गया।

इसके साथ ही युवाओं के हाथों में हुनर देने के लिए कोसा से सिल्क निकालने, उन्नत हथकरघा पर साड़ी बुनने और आधुनिक सिलाई का दो माह का विशेष प्रशिक्षण भी शुरू किया गया। यानी सुकमा में पुनर्वास की पहल अब सहायता से आगे बढ़कर हुनर, तकनीक और स्वरोजगार को आधार बनाने की दिशा में बढ़ रही है।

प्रभारी सचिव के इस एक दिवसीय दौरे में विकास की समीक्षा से लेकर पुनर्वास, कौशल विकास, डिजिटल सशक्तिकरण और पर्यटन तक कई महत्वपूर्ण पहलुओं को जमीन पर परखा गया। इस दौरान कलेक्टर अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर और जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

हुनर से बदलेगी जिंदगी, हाथों में आएगा रोजगार

लाइवलीहुड कॉलेज में प्रभारी सचिव राजेश सिंह राणा ने पुनर्वासित युवाओं के लिए विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ग्रामोद्योग विभाग की पहल से शुरू हुए इस प्रशिक्षण में 20 युवाओं को दो महीने तक कोसा से सिल्क निकालने, उन्नत हथकरघा पर साड़ी बुनने और आधुनिक सिलाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस प्रशिक्षण की खासियत यह है कि इसे स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल से जोड़ा गया है। सुकमा और बस्तर क्षेत्र की कोसा एवं हथकरघा परंपरा को आधुनिक तकनीक और बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित कर युवाओं के लिए आजीविका का साधन बनाने की कोशिश की जा रही है।

प्रशासन का जोर केवल प्रशिक्षण पूरा कराने पर नहीं, बल्कि युवाओं को आगे रोजगार और स्वरोजगार की दिशा में खड़ा करने पर है। हुनर मिलने के बाद युवा अपने स्तर पर काम शुरू कर सकें और अपनी आय का साधन विकसित कर सकें, यही इस पहल का मूल उद्देश्य है।

5G मोबाइल ने खोली डिजिटल दुनिया की खिड़की

आज के दौर में रोजगार, शिक्षा, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच के लिए डिजिटल तकनीक बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास केंद्र में 20 युवाओं को 5G स्मार्टफोन दिए गए।

स्मार्टफोन मिलने से युवाओं के लिए ऑनलाइन जानकारी, डिजिटल शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं और रोजगार-स्वरोजगार से जुड़ी संभावनाओं तक पहुंच आसान होगी। यह पहल पुनर्वासित युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

जब अधिकारी नहीं, अपना बनकर बैठे राणा

पुनर्वास केंद्र में कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक पहलू उस समय सामने आया, जब प्रभारी सचिव राजेश सिंह राणा ने पुनर्वासित युवाओं के साथ औपचारिकता छोड़कर सहज संवाद किया। उन्होंने युवाओं की बातें सुनीं, उनके अनुभव जाने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

इसके बाद उन्होंने पुनर्वासित युवाओं द्वारा तैयार किया गया भोजन उन्हीं के साथ बैठकर ग्रहण किया। यह दृश्य प्रशासनिक कार्यक्रम की औपचारिकता से बिल्कुल अलग नजर आया। अधिकारियों और युवाओं के बीच की दूरी को कम करते हुए साथ भोजन करने की पहल ने भरोसे और आत्मीयता का संदेश दिया।

यह तस्वीर इस बात को रेखांकित करती है कि पुनर्वास की सफलता केवल योजनाओं और संसाधनों से नहीं, बल्कि विश्वास और अपनत्व से भी जुड़ी होती है।

पुनर्वास का लक्ष्य: सम्मान के साथ नई शुरुआत

सुकमा जैसे संवेदनशील जिले में पुनर्वास नीति के तहत युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना बड़ी चुनौती और उतना ही बड़ा अवसर है। ऐसे में उन्हें प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधन और आत्मीय वातावरण उपलब्ध कराना पुनर्वास को स्थायी आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

युवाओं को यदि हुनर और अवसर दोनों मिलते हैं तो वे न केवल अपने परिवार के लिए आर्थिक सहारा बन सकते हैं, बल्कि समाज और क्षेत्र के विकास में भी सक्रिय भागीदारी निभा सकते हैं।

तुंगल डैम को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर

प्रवास के अंतिम चरण में प्रभारी सचिव तुंगल डैम पहुंचे। उन्होंने डैम की प्राकृतिक सुंदरता और वहां पर्यटन की संभावनाओं का जायजा लिया। उन्होंने क्षेत्र को सुव्यवस्थित एवं प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश कलेक्टर को दिए।

तुंगल डैम में भ्रमण के लिए पहुंचे स्कूली बच्चों से भी श्री राणा ने बातचीत की। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और स्कूल से जुड़ी जानकारी ली तथा उन्हें बेहतर भविष्य के लिए मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

एक दौरा, कई संदेश

प्रभारी सचिव का सुकमा दौरा प्रशासनिक निरीक्षण से आगे बढ़कर कई महत्वपूर्ण संदेश छोड़ गया। एक ओर अधिकारियों के साथ विकास योजनाओं की समीक्षा हुई, तो दूसरी ओर पुनर्वासित युवाओं को हुनर और तकनीक से जोड़ा गया। उनके साथ भोजन कर विश्वास और अपनत्व का संदेश दिया गया, वहीं तुंगल डैम में पर्यटन की संभावनाओं को देखकर स्थानीय विकास और रोजगार के नए रास्तों पर जोर दिया गया।

सुकमा में पुनर्वास की यह पहल अब एक नए मॉडल की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है—जहां सहायता के साथ कौशल, स्मार्टफोन के साथ डिजिटल अवसर और पुनर्वास के साथ सम्मानजनक आजीविका को जोड़ा जा रहा है।

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