खाकी के हाथ में झाड़ू क्यों? महिला आरक्षक का वीडियो वायरल, RI पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप

जांजगीर-चांपा पुलिस लाइन में मचा हड़कंप, ज्वाइनिंग नहीं देने का भी दावा; ASP ने दोनों पक्षों से मांगा जवाब
जांजगीर-चांपा। पुलिस की वर्दी पहनकर कानून-व्यवस्था संभालने वाली एक महिला आरक्षक के हाथ में झाड़ू और पुलिस लाइन के बाथरूम की सफाई करते हुए वीडियो सामने आने के बाद जांजगीर-चांपा पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महिला आरक्षक ने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करते हुए पुलिस लाइन के आरआई प्रदीप जोशी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वीडियो सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप की स्थिति है और अब मामले की जांच की बात कही जा रही है।

वायरल वीडियो में महिला आरक्षक पुलिस की वर्दी में पुलिस लाइन कार्यालय परिसर और बाथरूम की सफाई करती दिखाई दे रही है। वीडियो में वह आरआई के कार्यालय के आसपास सफाई करते हुए भी नजर आती है। महिला आरक्षक का आरोप है कि वह अपनी आमद यानी ज्वाइनिंग देने के लिए लगातार दो दिनों से आरआई से संपर्क करने का प्रयास कर रही थी, लेकिन उसे ज्वाइनिंग देने के बजाय सफाई का काम कराया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

ज्वाइनिंग के बदले सफाई? सवालों के घेरे में पुलिस लाइन
महिला आरक्षक के आरोप यदि जांच में सही पाए जाते हैं तो मामला केवल एक कर्मचारी से सफाई कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पुलिस विभाग में अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ व्यवहार, कार्य आवंटन और अधिकारों के इस्तेमाल से जुड़ा गंभीर प्रशासनिक प्रश्न बन सकता है। सवाल यह भी है कि पुलिस लाइन में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है और क्या किसी महिला आरक्षक को उसकी पुलिस ड्यूटी के बजाय ऐसे कार्य में लगाया जाना नियमसम्मत था?
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर एक आरक्षक को अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा क्यों लेना पड़ा? क्या विभाग के भीतर शिकायत सुनने और तत्काल समाधान की प्रभावी व्यवस्था नहीं है?
ASP ने दोनों से मांगा जवाब

मामले को गंभीरता से लेते हुए एडिशनल एसपी ने महिला आरक्षक और आरआई दोनों से जवाब तलब किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच के बाद जो भी पक्ष दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा घटनाक्रम वास्तव में किस परिस्थिति में हुआ? क्या महिला आरक्षक से नियमित कार्य के तहत सफाई कराई गई या उसके आरोपों के मुताबिक उसे प्रताड़ित किया गया? इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।


