छत्तीसगढ़

सुशासन में बुनकरों और महिला समूहों को रोजगार का संबल, अगस्त में 589.31 लाख का पारिश्रमिक भुगतान

साय सरकार की ‘वोकल फॉर लोकल’ की नीति को मिल रहा जमीनी आधार, 994 समूहों के खातों में RTGS से पहुंची राशि

चमन प्रकाश (कुर्रे)

रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और पारंपरिक हुनर को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में ग्रामोद्योग विभाग लगातार काम कर रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश, ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेन्द्र यादव के मार्गदर्शन तथा ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक श्री राजेश सिंह राणा (आईएएस) की अगुवाई में प्रदेश के बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों को बुनाई एवं गणवेश सिलाई के माध्यम से रोजगार का मजबूत आधार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी क्रम में अगस्त 2026 में प्रदेश के 26 जिलों के बुनकरों और महिला समूहों को कुल 589.31 लाख रुपये का पारिश्रमिक सीधे उनके बैंक खातों में RTGS के माध्यम से हस्तांतरित किया गया है।

विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अगस्त माह में प्रदेश की 121 बुनकर सहकारी समितियों के माध्यम से बुनाई कार्य में लगे बुनकरों को 397.31 लाख रुपये का पारिश्रमिक भुगतान किया गया। वहीं 873 महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिला सदस्यों को गणवेश सिलाई कार्य के एवज में 192.00 लाख रुपये का पारिश्रमिक उनके बैंक खातों में सीधे भेजा गया। इस तरह अगस्त महीने में कुल 994 समूहों को 589.31 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।

345 बुनकर समितियों और 2005 महिला समूहों को मिला लाभ

ग्रामोद्योग विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक प्रदेश में बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों को बड़े स्तर पर पारिश्रमिक का भुगतान किया जा चुका है। राज्य हाथकरघा संघ के माध्यम से इस अवधि तक प्रदेश की 345 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई पारिश्रमिक के रूप में 3717.00 लाख रुपये तथा 2005 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 1844.00 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।

इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त तक बुनाई एवं सिलाई कार्य से जुड़े हितग्राहियों को कुल 5561.00 लाख रुपये, यानी करीब 55.61 करोड़ रुपये, का पारिश्रमिक सीधे बैंक खातों में RTGS के माध्यम से हस्तांतरित किया जा चुका है।

स्थानीय हुनर को मिल रहा बाजार और रोजगार

सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल पारिश्रमिक भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पारंपरिक हुनर को रोजगार और बाजार से जोड़ना भी है। बुनकर सहकारी समितियों के माध्यम से बुनाई के कार्य को बढ़ावा देकर प्रदेश की पारंपरिक हथकरघा कला को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इसी तरह महिला स्व-सहायता समूहों को गणवेश सिलाई का कार्य मिलने से ग्रामीण एवं स्थानीय क्षेत्रों की महिलाओं को अपने घर और आसपास के क्षेत्र में ही रोजगार का अवसर प्राप्त हो रहा है।

इस व्यवस्था से महिलाओं को रोजगार के लिए दूर शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम हो रही है। समूह के माध्यम से मिलने वाले सिलाई कार्य से महिलाएं सामूहिक रूप से काम कर आय अर्जित कर रही हैं। इससे महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिल रही है।

RTGS से सीधे खाते में भुगतान, बिचौलियों की भूमिका खत्म

ग्रामोद्योग विभाग द्वारा पारिश्रमिक की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में RTGS के माध्यम से हस्तांतरित की जा रही है। इससे भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने के साथ ही बिचौलियों की भूमिका को कम करने में मदद मिल रही है। बुनकरों और महिला समूहों को उनके कार्य का पारिश्रमिक सीधे बैंक खाते में मिलने से भुगतान प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बन रही है।

विभाग का यह प्रयास सरकारी योजनाओं के लाभ को वास्तविक हितग्राहियों तक सीधे पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल काम करने वाले बुनकरों और महिलाओं को समय पर आर्थिक सहायता मिलती है, बल्कि उनके श्रम का उचित मूल्य भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

‘वोकल फॉर लोकल’ को मिल रही जमीनी ताकत

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों, स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक कौशल को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। ग्रामोद्योग विभाग द्वारा बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार से जोड़ने की पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

‘वोकल फॉर लोकल’ की अवधारणा के तहत स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों और उनसे जुड़े कारीगरों को बढ़ावा मिलने से प्रदेश की पारंपरिक कला और हस्तकौशल को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। बुनाई और सिलाई जैसे कार्यों को सरकारी आवश्यकताओं से जोड़कर स्थानीय समूहों को नियमित काम उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

रोजगार के साथ आत्मनिर्भरता की राह

ग्रामोद्योग विभाग की इस पहल से एक ओर जहां प्रदेश के बुनकरों को उनकी पारंपरिक कला के माध्यम से रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को सिलाई कार्य के जरिए आय का अवसर प्राप्त हो रहा है। नियमित पारिश्रमिक मिलने से समूहों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ महिलाओं में आत्मनिर्भरता की भावना को भी बढ़ावा मिल रहा है।

सरकार का जोर इस बात पर है कि प्रदेश के पारंपरिक हुनरमंद लोगों को उनके स्थानीय क्षेत्र में ही काम मिले और उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध हो। बुनकर सहकारी समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को कार्य से जोड़ने की यह व्यवस्था इसी उद्देश्य को आगे बढ़ा रही है।

अगस्त 2026 में 589.31 लाख रुपये तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त तक कुल 5561 लाख रुपये के पारिश्रमिक भुगतान के आंकड़े इस बात को रेखांकित करते हैं कि ग्रामोद्योग विभाग द्वारा रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश, ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेन्द्र यादव के मार्गदर्शन और सचिव सह प्रबंध संचालक श्री राजेश सिंह राणा की अगुवाई में विभाग की यह पहल बुनकरों एवं महिला समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आ रही है।

Show More

Related Articles

Back to top button