शिकायत के 25 दिन बाद भी जांच शुरू नहीं, संस्कृति विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

सतनाम संस्कृति एवं संगीत अकादमी के अनुदान मामलों की जांच की मांग, शिकायतकर्ता ने कहा— कार्रवाई के बजाय सिर्फ आश्वासन
नवा रायपुर। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ से शासकीय अनुदान प्राप्त करने से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में शिकायत के 25 दिन बाद भी जांच शुरू नहीं होने का मामला सामने आया है। सतनाम संस्कृति एवं संगीत अकादमी, छत्तीसगढ़ के संस्थापक एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यशवंत सोनबरसा ने 3 सितंबर 2026 को संचालक, संस्कृति विभाग, नवा रायपुर के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर संस्था से संबंधित अनुदान, कार्यक्रमों और दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, शिकायत में संस्था के वर्तमान पदाधिकारियों द्वारा संस्कृति विभाग से प्राप्त कथित आर्थिक अनुदान के उपयोग, कलाकारों को वास्तविक लाभ मिलने, कार्यक्रमों के आयोजन तथा विभाग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों की सत्यता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कथित फर्जी हस्ताक्षर, कूटरचित दस्तावेज तथा वास्तविक रूप से आयोजित नहीं हुए कार्यक्रमों के नाम पर अनुदान प्राप्त करने जैसे आरोपों की भी जांच की मांग की गई है।
हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
आठ बिंदुओं पर मांगी गई दस्तावेजी जांच
यशवंत सोनबरसा द्वारा दिए गए आवेदन में विभाग से मुख्य रूप से यह जांच कराने का अनुरोध किया गया है कि संस्था को पिछले वर्षों में किन-किन कार्यक्रमों के लिए अनुदान मिला, प्रत्येक कार्यक्रम के लिए कितनी राशि स्वीकृत एवं जारी हुई और उसका भुगतान किस माध्यम से किया गया।
इसके साथ ही संबंधित कार्यक्रम वास्तव में आयोजित हुए या नहीं, उनमें कितने कलाकार शामिल हुए, कलाकारों को कितना भुगतान किया गया तथा विभाग में प्रस्तुत आवेदन, सहमति-पत्र, उपस्थिति पत्रक, भुगतान विवरण, उपयोगिता प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेज वास्तविक एवं प्रमाणित हैं या नहीं— इसकी जांच की मांग की गई है।
शिकायत में संस्था के सदस्यों एवं कलाकारों के नाम से प्रस्तुत हस्ताक्षरों की सत्यता जांचने और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ अथवा फोरेंसिक परीक्षण कराने की मांग भी की गई है।
28 सितंबर को विभाग पहुंचे शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता के अनुसार, 28 सितंबर 2026 को वे अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई की जानकारी लेने संस्कृति विभाग पहुंचे। उनका कहना है कि अधिकारियों से शिकायत की स्थिति पूछने पर उन्हें बताया गया कि अभी तक कोई जांच अथवा कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। अधिकारियों द्वारा यह कहा गया कि जांच शुरू होने पर उन्हें इसकी जानकारी दी जाएगी।
शिकायतकर्ता ने इस जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब शिकायत में शासकीय अनुदान और दस्तावेजों से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं, तो मामले की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जांच पूरी होने तक नए अनुदान पर रोक की मांग
आवेदन में शिकायतकर्ता ने जांच पूरी होने तक संबंधित संस्था अथवा पदाधिकारियों से जुड़े कार्यक्रमों के अनुमोदन, आर्थिक अनुदान एवं भुगतान संबंधी कार्रवाई को रोकने तथा नया आर्थिक अनुदान जारी नहीं करने का अनुरोध किया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि जांच में फर्जी हस्ताक्षर, गलत या कूटरचित दस्तावेज, भ्रामक जानकारी, अनुदान राशि के दुरुपयोग अथवा बिना कार्यक्रम आयोजित किए अनुदान प्राप्त करने जैसी अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की जाए तथा शासकीय राशि की वसूली की जाए।
‘भ्रष्टाचार को संरक्षण’ का आरोप, विभाग का पक्ष जरूरी
शिकायतकर्ता ने कार्रवाई में देरी को लेकर भ्रष्टाचार को संरक्षण मिलने की आशंका जताई है और पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, विभागीय अधिकारियों की ओर से शिकायत पर अब तक की कार्रवाई के संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
ऐसे में फिलहाल यह मामला शिकायत में लगाए गए आरोपों और जांच की मांग तक सीमित है। आरोप सही हैं या नहीं, यह विभागीय जांच तथा संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब सवाल यह है कि शासकीय अनुदान से जुड़े इन आरोपों पर विभाग कब जांच शुरू करता है और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर क्या कार्रवाई की जाती है।



