
सुकमा की नक्सल पुनर्वासित महिलाओं ने किया मिस इंडिया फेमिने ईस्ट अनुष्का सोन के साथ स्वदेशी रैंप वॉक, कोसा को मिला ‘कोशल फैब’ का नया मंच, अब छत्तीसगढ़ के हाथकरघा उत्पाद पहुंचेंगे ग्लोबल बाजार तक
चमन प्रकाश केयर (कुर्रे)
रायपुर। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला, संस्कृति और बुनकरों के हुनर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने ब्रांड के लोगो और कैटलॉग का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रेशम, हाथकरघा , हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला क्षेत्र से जुड़े हितग्राहियों तथा मेधावी छात्र-छात्राओं को 10 करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक की अनुदान एवं पुरस्कार राशि वितरित की। इसके साथ ही हाथकरघा क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का भी शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम में बुनकरों, शिल्पकारों, कारीगरों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही। राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने एक ओर जहां छत्तीसगढ़ की पारंपरिक बुनाई और हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत को सामने रखा, वहीं दूसरी ओर आधुनिक तकनीक, ब्रांडिंग और बाजार के माध्यम से इस क्षेत्र को नई ऊंचाई देने का संदेश भी दिया।
स्वदेशी आंदोलन की विरासत से ‘लोकल टू ग्लोबल’ तक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों, विशेष रूप से बुनकरों और शिल्पकारों को राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि 7 अगस्त 1905 को प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में 7 अगस्त को राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की। इस दिवस का उद्देश्य देश की पारंपरिक बुनाई और उससे जुड़े लाखों कारीगरों के योगदान को सम्मान देना तथा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ का कोसा, बस्तर की बुनाई और प्रदेश के पारंपरिक हाथकरघा उत्पाद देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य इन उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ की नई पहचान दिलाना है। इसके लिए आधुनिक डिजाइन, प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और नए बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष रूप से काम किया जा रहा है।
‘कोशल फैब’ बनेगा छत्तीसगढ़ के कोसा की नई पहचान
कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ के प्रीमियम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ रहा। ‘लूम टू लग्जरी’ की अवधारणा पर आधारित यह ब्रांड छत्तीसगढ़ के कोसा और पारंपरिक हाथकरघा उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बुनकरों के पास परंपरा, कौशल और उत्कृष्ट उत्पाद हैं, लेकिन इन उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए आधुनिक ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जरूरत है। ‘कोशल फैब’ इसी दिशा में एक मजबूत माध्यम बनेगा।
इस ब्रांड के माध्यम से छत्तीसगढ़ के हाथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम उत्पाद के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। इससे बुनकरों को बेहतर बाजार, बेहतर मूल्य और अपनी कला को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।
हाथकरघा क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की शुरुआत
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ द्वारा तैयार हाथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का शुभारंभ भी किया गया।

इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से हाथकरघा उत्पादों के भंडारण, स्टॉक, प्रबंधन, विपणन और वितरण को अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। इससे उत्पादों की उपलब्धता और मांग की बेहतर निगरानी की जा सकेगी तथा बाजार की जरूरत के अनुसार उत्पादों के प्रबंधन में सुविधा होगी।
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा ने कहा कि ‘कोशल फैब’ ब्रांड, इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर और अन्य नवाचार छत्तीसगढ़ के बुनकरों एवं शिल्पकारों को आधुनिक बाजार, बेहतर ब्रांडिंग और डिजिटल विपणन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
बुनकरों के लिए साय सरकार की बड़ी पहल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार बुनकरों और शिल्पकारों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 469 आवासविहीन बुनकर परिवारों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण की स्वीकृति दी गई है। इससे उन परिवारों को कार्यस्थल और आवास दोनों की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।

इसी अवधि में राज्य में आयोजित 47 प्रदर्शनियों के माध्यम से लगभग 10 करोड़ रुपये के हाथकरघा उत्पादों की बिक्री हुई। इससे बुनकरों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर बाजार मिला और उनके कारोबार को गति मिली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाथकरघा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए पिछले ढाई वर्षों में 2,001 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 68 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।
436 करोड़ के वस्त्रों की सरकारी खरीदी
राज्य सरकार द्वारा बुनकरों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ शासकीय खरीदी के माध्यम से भी उन्हें आर्थिक मजबूती देने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा पांच विक्रय भंडारों तथा केंद्रीय वस्त्रागार के माध्यम से विभिन्न शासकीय विभागों को 93 करोड़ रुपये के वस्त्र उपलब्ध कराए गए हैं।

इसके अलावा बुनकरों द्वारा निर्मित 436 करोड़ रुपये के वस्त्रों की शासकीय खरीदी की गई है। सरकार का मानना है कि इससे बुनकरों को सुनिश्चित बाजार और आर्थिक स्थिरता मिलती है।
पांच प्रमुख एयरपोर्ट पर दिखेगा छत्तीसगढ़ का हुनर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के हाथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में देश के पांच प्रमुख एयरपोर्ट पर छत्तीसगढ़ के हैंडलूम एवं हस्तशिल्प उत्पादों के शोरूम स्थापित किए जा रहे हैं। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों से आने-जाने वाले यात्रियों को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक उत्पादों की जानकारी और खरीदारी का अवसर मिलेगा।
रायपुर में निर्माणाधीन यूनिटी मॉल को भी स्थानीय उत्पादों के लिए आधुनिक बाजार के रूप में विकसित किया जा रहा है।
नवा रायपुर की गारमेंट इकाई से 4500 से ज्यादा रोजगार
मुख्यमंत्री ने बताया कि नवा रायपुर में प्रदेश की पहली गारमेंट इकाई स्थापित की जा रही है। इससे 4,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
इसके साथ ही नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी यानी NIFT की स्थापना से प्रदेश के युवाओं को फैशन, डिजाइन और टेक्सटाइल क्षेत्र में प्रशिक्षण एवं रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

सरकार का मानना है कि आधुनिक डिजाइन और तकनीकी प्रशिक्षण को पारंपरिक हाथकरघा से जोड़ने से छत्तीसगढ़ का हैंडलूम उद्योग नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं का रैंप वॉक बना आकर्षण
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस समारोह का सबसे भावनात्मक और प्रेरक क्षण उस समय सामने आया जब बस्तर की आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने स्वदेशी फैशन शो में रैंप वॉक किया।
इन महिलाओं ने छत्तीसगढ़ के कोसा सिल्क और पारंपरिक हैंडलूम परिधानों को पहनकर आत्मविश्वास के साथ रैंप पर प्रस्तुति दी। यह सिर्फ फैशन शो नहीं था, बल्कि मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही महिलाओं के आत्मविश्वास और बदलते बस्तर की सकारात्मक तस्वीर का संदेश भी था।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी इन महिलाओं से आत्मीय संवाद किया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
खास बात यह रही कि इनमें से लगभग सभी महिलाएं पहली बार रायपुर पहुंची थीं। उनके लिए यह अनुभव बेहद खास और यादगार रहा। फैशन शो का नेतृत्व बस्तर की बेटी और मिस इंडिया ईस्ट 2026 अनुष्का सोन ने किया।
मुख्यमंत्री ने खुद खरीदी कोसा साड़ी
स्वदेशी प्रदर्शनी के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ, बिलासा हैंडलूम, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, सबरी एम्पोरियम और माटीकला बोर्ड सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों में प्रदर्शित उत्पादों को देखा।
मुख्यमंत्री ने कारीगरों से सीधे संवाद कर उत्पादों की गुणवत्ता, बाजार, बिक्री और रोजगार की संभावनाओं की जानकारी ली।

प्रदर्शनी के दौरान मुख्यमंत्री ने हाथकरघा स्टॉल से तत्काल भुगतान कर कोसा साड़ी खरीदी। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पाद खरीदना बुनकरों और शिल्पकारों के श्रम एवं हुनर का सबसे बड़ा सम्मान है।
मुख्यमंत्री के इस कदम से कार्यक्रम में मौजूद बुनकरों और महिला कारीगरों का उत्साह बढ़ा।
विधानसभा अध्यक्ष ने हर परिवार से हाथकरघा उत्पाद खरीदने की अपील की
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश में करीब 1 लाख 20 हजार परिवार हाथकरघा और इससे संबंधित गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस की शुरुआत से इस क्षेत्र को नई पहचान मिली है। उन्होंने प्रदेशवासियों से प्रत्येक वर्ष कम से कम एक हाथकरघा उत्पाद खरीदने की अपील की।
उन्होंने कहा कि बुनकरों की मेहनत, कला और परंपरा को जीवित रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।
कोसा साड़ी को देश में विशिष्ट पहचान
ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव ने स्वदेशी आंदोलन की विरासत को याद करते हुए कहा कि 7 अगस्त 1905 को प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन ने देश में आत्मनिर्भरता की अलख जगाई थी।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कोसा साड़ी देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। राज्य सरकार हाथकरघा , हस्तशिल्प और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
935 मेधावी विद्यार्थियों को 81.83 लाख की प्रोत्साहन राशि
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को अनुदान एवं पुरस्कार राशि वितरित की।
कक्षा 10वीं एवं 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 935 छात्र-छात्राओं को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इसके अलावा 17 वरिष्ठ बुनकरों को सम्मान राशि देकर उनके योगदान का सम्मान किया गया।

हाथकरघा संचालनालय के माध्यम से 49 बुनकरों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण हेतु 1.22 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति की जानकारी दी गई। पांच बुनकर सहकारी समितियों को भवन निर्माण के लिए 75 लाख रुपये की सहायता तथा 85 बुनकरों को उन्नत करघे एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए।
साइटसेवर्स इंडिया के सहयोग से नेत्र परीक्षण कराने वाले बुनकरों को चश्मों का वितरण भी किया गया।
रेशम कृषकों और शिल्पकारों को भी सहायता
रेशम संचालनालय के माध्यम से सिल्क समग्र योजना के तहत 21 रेशम कृषकों को सहायता राशि प्रदान की गई। मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के हितग्राहियों को अनुदान राशि वितरित की गई।
हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा 30 शिल्पकारों को आधुनिक टूल किट तथा माटीकला बोर्ड द्वारा 70 पंजीकृत माटी शिल्पियों को विद्युत चाक प्रदान किए गए। इससे पारंपरिक कारीगरों के उत्पादन और आय को बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर उत्कृष्ट बुनकरों को राज्य स्तरीय स्व. बिसाहूदास महंत सर्वश्रेष्ठ बुनकर पुरस्कार तथा राजराजेश्वरी करुणामाता हाथकरघा प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
‘सेल्फी विद स्वदेशी’ से जुड़ेगा प्रदेश
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्वदेशी उत्पादों को खरीदने और ‘सेल्फी विद स्वदेशी’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पाद खरीदना सिर्फ एक वस्तु खरीदना नहीं है, बल्कि इससे बुनकरों, शिल्पकारों और कारीगरों की आजीविका मजबूत होती है। स्वदेशी उत्पादों के साथ सोशल मीडिया पर सेल्फी साझा करने वाले प्रत्येक जिले के चयनित प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा।
सरकार का दावा—स्वदेशी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के तहत किए गए विभिन्न कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना से लाखों गरीब परिवारों को पक्के मकान का लाभ मिल रहा है।
उन्होंने किसानों को धान खरीदी की अंतर राशि के भुगतान, भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता, महतारी वंदन योजना और तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए चरण पादुका योजना के पुनः संचालन का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के 50 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और आत्मनिर्भर एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है।
कार्यक्रम में उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा बुनकर संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पांडेय, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, संस्कृत विद्या मंडलम के अध्यक्ष राजेश राजपूत, पूर्व सांसद चुन्नीलाल साहू, ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, बुनकर, शिल्पकार और कारीगर उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस पर आयोजित यह आयोजन छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला और आधुनिक बाजार के बीच एक नए सेतु के रूप में सामने आया। ‘कोशल फैब’ ब्रांड, डिजिटल इन्वेंट्री सिस्टम, आधुनिक प्रशिक्षण, नए बाजार और सरकारी खरीदी जैसी पहलों के जरिए अब छत्तीसगढ़ के कोसा और हाथकरघा उत्पादों को स्थानीय बाजार से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।



