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एक दिन में 150 से ज्यादा एफआईआर,रायपुर के 33 थानों में एक साथ दर्ज हुए अपहरण के मामले,

महिलाओं और युवतियों के गायब होने की शिकायतें सबसे ज्यादा

चमन प्रकाश केयर (कुर्रे)

रायपुर। राजधानी रायपुर में लंबे समय से लंबित पड़ी गुमशुदगी की शिकायतों को लेकर पुलिस ने अचानक बड़ा कदम उठाया है। पुलिस कमिश्नरेट और रायपुर ग्रामीण क्षेत्र के करीब 33 थानों में एक ही दिन 150 से अधिक प्रकरण दर्ज किए गए। इन मामलों में बड़ी संख्या महिलाओं और युवतियों के लापता होने से जुड़ी है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत गुमशुदगी की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 140(3) के तहत अपहरण की आशंका में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है।

थानों में दबे पड़े थे गुमशुदगी के आवेदन

दरअसल, राजधानी के विभिन्न थानों में बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन लंबित थे, जिनमें लोगों के अचानक लापता होने की जानकारी दी गई थी। हाल ही में पुलिस मुख्यालय द्वारा जिलों से लंबित गुम इंसान प्रकरणों और शिकायतों की विस्तृत जानकारी मांगी गई। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने थानों में लंबित शिकायतों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

निर्देश मिलते ही थानों में पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए और लंबित शिकायतों को बाहर निकाला गया। जांच के दौरान जिन मामलों में प्रथम दृष्टया किसी व्यक्ति के गायब होने के पीछे उसे बहला-फुसलाकर, जबरन या किसी अन्य तरीके से ले जाने की आशंका सामने आई, उनमें एफआईआर दर्ज की गई।

नाबालिगों के बाद अब बालिगों की गुमशुदगी पर भी सख्ती

अब तक पुलिस व्यवस्था में नाबालिगों के गुम होने की सूचना को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुरूप प्रथम दृष्टया अपहरण मानकर कार्रवाई की जाती रही है। वहीं, अगस्त से बालिग व्यक्तियों की गुमशुदगी के मामलों में भी अपहरण की आशंका को ध्यान में रखते हुए प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं।

हालांकि एफआईआर दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि हर मामले में अपहरण की पुष्टि हो गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, प्रत्येक प्रकरण में अलग-अलग परिस्थितियों की जांच की जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

महिलाओं और युवतियों की गुमशुदगी ने बढ़ाई चिंता

एक ही दिन में दर्ज हुए 150 से अधिक मामलों में महिलाओं और युवतियों के लापता होने की शिकायतों की संख्या उल्लेखनीय रूप से अधिक बताई जा रही है। इससे पुलिस के सामने न केवल इन लोगों का पता लगाने की चुनौती खड़ी हुई है, बल्कि यह भी जांच का विषय है कि वे किन परिस्थितियों में घर से गायब हुईं और उनके लापता होने के पीछे कोई आपराधिक कारण तो नहीं है।

पुलिस अब पुराने लंबित मामलों की फाइलों को दोबारा खंगाल रही है। मोबाइल नंबर, संपर्क सूत्र, संभावित स्थानों, परिजनों और परिचितों से पूछताछ सहित उपलब्ध अन्य सुरागों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी।

अचानक बढ़ा एफआईआर का आंकड़ा

पुलिस के रिकॉर्ड में एक दिन में 150 से अधिक अपहरण के मामले दर्ज होने से आंकड़ा अचानक बढ़ा है। हालांकि पुलिस इसे अपराध में अचानक हुई वृद्धि के तौर पर नहीं देख रही है। अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में मामले पहले से लंबित गुमशुदगी की शिकायतों से संबंधित हैं, जिन पर अब कानूनी प्रक्रिया के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन 150 से अधिक मामलों में कितने लोग स्वयं कहीं चले गए थे, कितने वापस मिलेंगे और कितने मामलों में वास्तव में अपहरण या किसी अन्य आपराधिक साजिश के तथ्य सामने आते हैं। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच से इन मामलों की असली तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

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