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CP VOICE 24 न्यूज़ की खबर का बड़ा असर: हाथकरघा विभाग का कड़ा एक्शन, मारुति कोटेक्स से ₹22.42 लाख की वसूली के निर्देश

गैर-हाथकरघा वेस्टेज कपड़ा खपाने के मामले में कार्रवाई तेज, तकनीकी कर्मचारी की सेवा समाप्त और तत्कालीन गोदाम प्रभारी हुए निलंबित

चमन प्रकाश केयर (कुर्रे)

रायपुर। छत्तीसगढ़ के हथकरघा विभाग में सामने आए गैर-हाथकरघा वेस्टेज कपड़े से जुड़े मामले में अब विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। डूमरतराई स्थित हथकरघा विभाग के गोदाम में गैर-हाथकरघा वेस्टेज कपड़ा पहुंचाए जाने के मामले को लेकर सीपी वॉइस 24 न्यूज़ ने लगातार खबरों के माध्यम से सवाल उठाए थे। खबरों में विभागीय व्यवस्था, गोदाम में आने वाले कपड़े की जांच और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल सामने रखे गए थे।

अब विभागीय जांच के बाद इस पूरे मामले में कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया है। राज्य हाथकरघा संघ द्वारा हैदराबाद की कंपनी मारुति कोटेक्स लिमिटेड से ₹22 लाख 42 हजार 616 की वसूली करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही मामले में तत्कालीन गोदाम प्रभारी रामकिशुन देवांगन को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है। वहीं संबंधित तकनीकी कर्मचारी की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई भी की गई है। विभाग की इस कार्रवाई को सीपी वॉइस 24 न्यूज़ द्वारा उठाए गए मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार राज्य हाथकरघा संघ द्वारा वर्ष 2025-26 में जेम पोर्टल के माध्यम से नियमानुसार निविदा आमंत्रित की गई थी। निविदा प्रक्रिया के तहत हाथकरघा ग्रे वस्त्रों का डाइंग, प्रोसेसिंग एवं प्रिंटिंग संबंधी जॉब वर्क कराने के लिए हैदराबाद स्थित मारुति कोटेक्स लिमिटेड को कार्य सौंपा गया था। इस कार्य के अंतर्गत हाथकरघा संघ की ओर से कंपनी को कुल 65.06 लाख मीटर ग्रे वस्त्र उपलब्ध कराया गया था। निर्धारित प्रक्रिया के तहत कंपनी द्वारा प्रोसेसिंग के बाद लगभग 63.16 लाख मीटर फ्रेश वस्त्र वापस प्रदाय किया गया।इसके बाद शेष कपड़े के संबंध में कटपीस, सेकंड क्लास, मिस प्रिंट एवं वेस्टेज की स्थिति सामने आई।

इसी दौरान संघ के संज्ञान में यह मामला आया कि कंपनी की ओर से वापस भेजे गए वेस्टेज कपड़े में बड़ी मात्रा में ऐसा कपड़ा शामिल था, जो हाथकरघा संघ द्वारा उपलब्ध कराए गए मूल वस्त्र से संबंधित नहीं था। बताया गया कि कंपनी की ओर से भेजे गए लगभग 60,236 मीटर कटपीस, सेकंड क्लास, मिस प्रिंट एवं वेस्टेज कपड़े की जांच किए जाने की आवश्यकता महसूस हुई। मामला सामने आने के बाद संघ कार्यालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए विभागीय स्तर पर जांच समिति गठित की।

भौतिक परीक्षण और नमूना जांच से खुला मामला

विभागीय जांच समिति द्वारा संबंधित कपड़े का भौतिक परीक्षण किया गया। इसके अलावा उपलब्ध रिकॉर्ड, बिल, दस्तावेज और कपड़े के नमूनों की भी जांच की गई। जांच के दौरान समिति के सामने यह तथ्य आया कि मारुति कोटेक्स की ओर से भेजे गए वेस्टेज कपड़े में ऐसा वस्त्र भी शामिल था, जो हाथकरघा संघ से संबंधित नहीं था। यानी जिस प्रक्रिया के तहत संघ द्वारा उपलब्ध कराए गए हाथकरघा ग्रे वस्त्र की प्रोसेसिंग की जानी थी, उसके बाद निकलने वाले वेस्टेज के साथ अन्य प्रकार के कपड़े भी पाए गए।

मामले में तत्कालीन गोदाम प्रभारी की भूमिका को लेकर भी विभागीय स्तर पर सवाल सामने आए। जांच के अनुसार गोदाम में प्राप्त डैमेज एवं वेस्टेज कपड़े की स्थिति के संबंध में तत्कालीन गोदाम प्रभारी द्वारा संघ कार्यालय को समय रहते आवश्यक जानकारी नहीं दी गई। यही वजह रही कि जांच के बाद तत्कालीन गोदाम प्रभारी को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई।

तकनीकी रिपोर्ट भी जांच के घेरे में

इस मामले में संबंधित तकनीकी कर्मचारी की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। प्राप्त डैमेज एवं वेस्टेज कपड़े के संबंध में तकनीकी कर्मचारी द्वारा जो तकनीकी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, उसे भी विभागीय जांच के दौरान संदेहास्पद माना गया। जांच समिति द्वारा कपड़े के वास्तविक नमूनों और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण किए जाने के बाद तकनीकी रिपोर्ट की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े हुए। इसके बाद विभाग ने संबंधित तकनीकी कर्मचारी लोकेश ढीढी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसकी सेवा समाप्त कर दी।इस कार्रवाई से साफ है कि विभाग ने केवल कंपनी की जिम्मेदारी तय करने तक मामला सीमित नहीं रखा, बल्कि विभागीय स्तर पर जिम्मेदार पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है।

कानूनी सलाह के बाद आगे बढ़ी कार्रवाई

पूरे मामले में विभाग द्वारा कानूनी सलाह भी ली गई। उपलब्ध दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर विधिक अभिमत प्राप्त करने के बाद राज्य हाथकरघा संघ ने आगे की कार्रवाई की। संघ द्वारा गैर-हाथकरघा वेस्टेज कपड़े को जब्त करने की कार्रवाई की गई। साथ ही मामले में संघ को हुई वित्तीय क्षति की गणना कर संबंधित कंपनी से राशि की वसूली के निर्देश जारी किए गए। इस कार्रवाई में विभाग ने कपड़े की मात्रा और उसकी निर्धारित कीमत के आधार पर वित्तीय गणना की।

₹22.42 लाख की वसूली का गणित

जांच के अनुसार लगभग 60,236 मीटर गैर-हाथकरघा वेस्टेज कपड़े का मामला सामने आया। इस कपड़े की गणना के लिए ग्रे वस्त्र की कीमत ₹88.61 प्रति मीटर निर्धारित की गई। इस आधार पर कुल राशि लगभग ₹53,37,512 निर्धारित हुई। विभागीय गणना के अनुसार इस राशि का 25 प्रतिशत यानी ₹13,34,378 वसूली योग्य राशि के रूप में निर्धारित किया गया। इसके अलावा मारुति कोटेक्स को प्रिंटिंग कार्य के लिए संघ कार्यालय द्वारा भुगतान किए गए ₹9,08,238 की राशि को भी वसूली में शामिल किया गया। इस प्रकार दोनों राशियों को मिलाने पर कंपनी से कुल ₹22,42,616, यानी लगभग ₹22.42 लाख की वसूली करने के निर्देश जारी किए गए हैं। विभागीय कार्रवाई में यह राशि महत्वपूर्ण है, क्योंकि मामला केवल कपड़े की गुणवत्ता या वेस्टेज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे जुड़े संभावित वित्तीय नुकसान की भरपाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

राजेश सिंह राणा के निर्देश पर कार्रवाई

मामले में राज्य हाथकरघा संघ के प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा (भा.प्र.से.) के निर्देश पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया। जांच रिपोर्ट और विधिक अभिमत के आधार पर संबंधित कंपनी से वित्तीय वसूली तथा विभागीय स्तर पर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।विभागीय कार्रवाई के तहत एक तरफ कंपनी से ₹22.42 लाख की वसूली का निर्देश दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ तकनीकी कर्मचारी की सेवा समाप्त करने तथा तत्कालीन गोदाम प्रभारी रामकिसुन देवांगन को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि विभाग ने मामले में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।

सीपी वॉइस 24 ने लगातार उठाया था मुद्दा

हथकरघा विभाग से जुड़े इस मामले को सीपी वॉइस 24 न्यूज़ ने लगातार प्रमुखता से उठाया था। डूमरतराई स्थित गोदाम में गैर-हाथकरघा वेस्टेज कपड़े से जुड़े मामले को लेकर चैनल ने विभागीय व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए खबरें प्रकाशित की थीं। मीडिया में मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ी और अब जांच के परिणाम के आधार पर कार्रवाई सामने आई है।

कार्रवाई से विभाग में जवाबदेही का संदेश

हथकरघा विभाग की इस कार्रवाई को विभागीय जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एक ओर कंपनी से लाखों रुपये की वसूली के निर्देश जारी किए गए हैं, तो दूसरी ओर विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है। अब आगे की नजर इस बात पर रहेगी कि ₹22.42 लाख की वसूली किस प्रकार और कितनी जल्दी पूरी होती है, तथा निलंबित तत्कालीन गोदाम प्रभारी के खिलाफ चलने वाली विभागीय जांच में क्या निष्कर्ष सामने आता है। इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में हथकरघा संघ के गोदामों में आने वाले कपड़े की जांच, गुणवत्ता परीक्षण और वेस्टेज के रिकॉर्ड को लेकर क्या नई व्यवस्था लागू की जाती है, ताकि इस तरह की स्थिति दोबारा पैदा न हो।

“हाथकरघा संघ के कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही अथवा वित्तीय नुकसान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गैर-हाथकरघा वेस्टेज कपड़ा भेजे जाने के मामले में जांच के आधार पर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। कंपनी द्वारा भेजे गए गैर-हाथकरघा वेस्टेज कपड़े को जब्त किया गया है और संघ को हुई वित्तीय क्षति की वसूली के निर्देश दिए गए हैं। विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

राजेश सिंह राणा (भा.प्र.से.) ,प्रबंध संचालक छ.ग. राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ मर्या.

“हाथकरघा विभाग में शासन की मंशा के अनुरूप पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य किया जा रहा है। मारुति कोटेक्स से संबंधित मामले में विभागीय जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है। तकनीकी कर्मचारी की सेवा समाप्त करने और तत्कालीन गोदाम प्रभारी को निलंबित करने की कार्रवाई नियमानुसार की गई है। साथ ही कंपनी से 22.42 लाख रुपये की वसूली के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।”

एम् एम् जोशी सचिव, छ.ग. राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ मर्या.

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