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मानसिक प्रताड़ना से टूटे अपर कलेक्टर! 'यदि मेरी मौत होती है तो जिम्मेदार होंगी बेमेतरा कलेक्टर'

एससी आयोग को लिखे पत्र से प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप

15 दिनों में पांच कारण बताओ नोटिस, मानसिक उत्पीड़न, खराब वाहन आबंटन और अपमानित किए जाने के गंभीर आरोप; आयोग से लगाई न्याय की गुहार

चमन प्रकाश केयर (कुर्रे)

बेमेतरा। जिले के प्रशासनिक महकमे में एक बड़ा विवाद सामने आया है। बेमेतरा में पदस्थ अपर कलेक्टर गुड्डू लाल जगत द्वारा राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग को भेजे गए आवेदन और उससे जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है। आवेदन में उन्होंने जिला कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई पर लगातार मानसिक प्रताड़ना, बार-बार कारण बताओ नोटिस जारी कर परेशान करने, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आयोग के अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में अपर कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि लगातार मानसिक तनाव के कारण वे कई दिनों से ठीक से सो नहीं पा रहे हैं और यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना, दुर्घटना अथवा मृत्यु होती है तो इसके लिए बेमेतरा कलेक्टर को जिम्मेदार माना जाए। इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद पूरे जिले में इसकी चर्चा तेज हो गई है।


कन्या सामूहिक विवाह योजना के बाद बिगड़े हालात?

अनुसूचित जनजाति आयोग को दिए आवेदन में अपर कलेक्टर ने उल्लेख किया है कि वे मार्च 2024 से बेमेतरा में पदस्थ हैं। उनके अनुसार मुख्यमंत्री कन्या सामूहिक विवाह योजना में हुई अव्यवस्था के बाद से उन्हें लगातार निशाना बनाया जाने लगा। उनका दावा है कि इसके बाद उनके खिलाफ लगातार विभागीय कार्रवाई का माहौल बनाया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।


15 दिनों में पांच बार कारण बताओ नोटिस

आवेदन के अनुसार 31 मई से 17 जून 2026 के बीच मात्र 15 दिनों में उन्हें पांच अलग-अलग कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। अपर कलेक्टर का कहना है कि उन्होंने सभी नोटिसों का निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन इसके बावजूद नोटिसों का सिलसिला नहीं रुका।

उनका आरोप है कि इन नोटिसों का उद्देश्य प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना नहीं बल्कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना था।


बीमार होने के बावजूद दो घंटे कराया इंतजार

आयोग को लिखे आवेदन में अपर कलेक्टर ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एक नोटिस के संबंध में जवाब देने के लिए बुलाए जाने पर उन्हें लगभग दो घंटे तक कक्ष के बाहर इंतजार कराया गया।

उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले ही अपनी खराब तबीयत की जानकारी दे दी थी, इसके बावजूद उन्हें बाहर खड़ा रखा गया। उनके अनुसार यह व्यवहार एक वरिष्ठ अधिकारी के सम्मान के विपरीत था और इससे उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा।


‘रातों की नींद उड़ गई, यदि कुछ हुआ तो जिम्मेदार कलेक्टर’

18 जून 2026 को अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष को लिखे पत्र में अपर कलेक्टर ने कहा कि लगातार मानसिक तनाव के कारण वे पिछले कई दिनों से ठीक से सो नहीं पा रहे हैं।

उन्होंने लिखा—

“यदि मेरे साथ किसी प्रकार की घटना, दुर्घटना अथवा मेरी मृत्यु होती है तो इसके लिए एकमात्र कलेक्टर जिला बेमेतरा पूर्ण रूप से जिम्मेदार होंगी।”

यह कथन पूरे मामले का सबसे संवेदनशील और गंभीर पक्ष माना जा रहा है।


टीएल बैठक में मौजूद थे, फिर भी अनुपस्थित बताकर नोटिस

अपर कलेक्टर ने आरोप लगाया कि पांच कारण बताओ नोटिसों में से एक नोटिस ऐसा भी था जिसमें उन्हें टीएल बैठक में अनुपस्थित बताया गया, जबकि वे बैठक में मौजूद थे।

उनका कहना है कि जब वास्तविक उपस्थिति के बावजूद अनुपस्थित बताकर नोटिस जारी किया गया, तब उन्हें यह स्पष्ट महसूस हुआ कि उनके विरुद्ध जानबूझकर कार्रवाई की जा रही है। इसी कारण उन्होंने न्याय की उम्मीद में अनुसूचित जनजाति आयोग का दरवाजा खटखटाया।


खराब सरकारी वाहन का आबंटन, कामकाज प्रभावित होने का दावा

अपर कलेक्टर ने एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार 22 जुलाई 2026 को कलेक्टर कार्यालय द्वारा उन्हें जो सरकारी वाहन आवंटित किया गया, वह पहले से खराब और लंबे समय से अनुपयोगी था।

उन्होंने कलेक्टर को लिखे अपने पत्र में कहा कि यदि वाहन की मरम्मत नहीं कराई गई तो जिला मुख्यालय से बाहर के प्रशासनिक कार्यों का निर्वहन करना उनके लिए संभव नहीं होगा।

उन्होंने इसे भी प्रशासनिक उपेक्षा और कार्य में बाधा उत्पन्न करने वाला कदम बताया है।


प्रशासनिक गलियारों में तेज हुई चर्चा

एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी स्तर के प्रशासनिक अधिकारी द्वारा मानसिक प्रताड़ना, लगातार विभागीय नोटिस, सार्वजनिक अपमान, खराब वाहन आबंटन तथा अनुसूचित जनजाति आयोग से न्याय की गुहार लगाने जैसे आरोपों ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है।

यह मामला अब केवल विभागीय अनुशासन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली, वरिष्ठ अधिकारियों के व्यवहार और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर प्रश्न भी खड़े कर रहा है।


कलेक्टर का पक्ष नहीं मिला

इस संबंध में बेमेतरा कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर कॉल, मैसेज एवं व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।

कलेक्टर का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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