छत्तीसगढ़

नक्सल पुनर्वास केंद्रों में हथकरघा से स्वरोजगार की नई पहल

80 हितग्राहियों के लिए नवीन बुनाई प्रशिक्षण को ₹27.20 लाख की वित्तीय स्वीकृति

चमन प्रकाश केयर (कुर्रे)

रायपुर। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वासित परिवारों और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में ग्रामोद्योग विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री के निर्देश एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेन्द्र यादव के मार्गदर्शन में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह संचालक सह प्रबंध संचालक श्री राजेश सिंह राणा (आईएएस) के नेतृत्व में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए समग्र हाथकरघा विकास योजना के अंतर्गत नक्सल पुनर्वास केंद्रों में नवीन बुनाई प्रशिक्षण के लिए कुल ₹27.20 लाख की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

11 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार बस्तर संभाग के चार नक्सल पुनर्वास केंद्रों के कुल 80 हितग्राहियों को हथकरघा एवं बुनाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक केंद्र के लिए ₹6.80 लाख की राशि स्वीकृत की गई है। प्रशिक्षण का उद्देश्य हितग्राहियों को पारंपरिक बुनाई कला में दक्ष बनाकर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

चार केंद्रों में 80 हितग्राही होंगे प्रशिक्षित

योजना के तहत कोण्डागांव जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र देवखरगांव के 20 हितग्राहियों को नवीन बुनाई प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी चंदेनी बुढ़ीमाता बुनकर सहकारी समिति मर्यादित, सलना, कोण्डागांव को दी गई है। इसके लिए समिति को ₹6.80 लाख की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है।

इसी प्रकार नारायणपुर जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र गारंजी के 20 हितग्राहियों के प्रशिक्षण के लिए भी चंदेनी बुढ़ीमाता बुनकर सहकारी समिति मर्यादित, सलना को ₹6.80 लाख की राशि स्वीकृत की गई है।

दंतेवाड़ा जिले के नक्सल पुनर्वास लाइवलीहुड कॉलेज के 20 हितग्राहियों के कौशल विकास की जिम्मेदारी कंकालीन बुनकर सहकारी समिति मर्यादित, बजावण्ड, बस्तर को सौंपी गई है। इसके लिए समिति को ₹6.80 लाख की वित्तीय स्वीकृति दी गई है।

वहीं बस्तर जिले के नक्सल पुनर्वास लाइवलीहुड कॉलेज के 20 हितग्राहियों को नवीन बुनाई प्रशिक्षण देने के लिए महामाया बुनकर सहकारी समिति मर्यादित, छोटेदेवड़ा, बस्तर को भी ₹6.80 लाख की राशि आबंटित की गई है।

हथकरघा बनेगा आत्मनिर्भरता का माध्यम

ग्रामोद्योग विभाग की इस पहल का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वासित हितग्राहियों को कौशल, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद हितग्राही हथकरघा आधारित गतिविधियों को आजीविका का माध्यम बना सकेंगे।

इससे स्थानीय स्तर पर पारंपरिक बुनाई कला को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ हितग्राहियों के लिए आय के नए रास्ते भी विकसित होने की उम्मीद है। योजना के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है।

ग्रामोद्योग विभाग की यह पहल हथकरघा को आजीविका से जोड़ते हुए पुनर्वास नीति को आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

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