हाथकरघा-हस्तशिल्प उत्पादों को मिलेगी वैश्विक बाजार की राह, आज रायपुर में निर्यात संवर्धन कार्यशाला

चमन प्रकाश केयर (कुर्रे)
रायपुर। छत्तीसगढ़ के हाथकरघा, हस्तशिल्प एवं परिधान क्षेत्र से जुड़े बुनकरों, कारीगरों और उद्यमियों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में 7 अक्टूबर को रायपुर में महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गयी। “निर्यात संवर्धन एवं डिजाइन विकास” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में निर्यात की संभावनाओं से लेकर लाइसेंस, वित्तीय सुरक्षा, सरकारी सहायता और आधुनिक डिजाइन तक विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दिया गया।

कार्यशाला का आयोजन कन्वेंशन हॉल, न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, रायपुर में हुआ । कार्यक्रम में प्रतिभागियों के पंजीयन के बाद विभिन्न सत्रों में हाथकरघा, हस्तशिल्प और अपैरल क्षेत्र को निर्यात बाजार में आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हुई ।
कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विवरण संघ मर्यादित रायपुर के अध्यक्ष भोजराम देवांगन, ग्रामोउद्योग विभाग के सचिव एवं प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा हाथकरघा विभाग के सचिव एम एम जोशी सहित विभाग के अधिकारी कर्मचारी एवं बुनकर समिति के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे l

वहीं DGFT नागपुर एवं उद्योग विभाग के अधिकारियों द्वारा हाथकरघा, हस्तशिल्प एवं अपैरल क्षेत्र में निर्यात की संभावनाओं, निर्यात प्रक्रिया और निर्यात लाइसेंस से संबंधित जानकारी दी गयी । वहीं Export Credit Guarantee Corporation of India (ECGC) की ओर से निर्यातकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और निर्यात कारोबार से जुड़े जोखिमों के संबंध में जानकारी दिया गया ।

इसके अलावा छत्तीसगढ़ औद्योगिक नीति के प्रावधानों के तहत मिलने वाली सहायता तथा MSME मंत्रालय द्वारा हाथकरघा, हस्तशिल्प एवं अपैरल क्षेत्र के लिए संचालित योजनाओं और सहायता की जानकारी भी उद्यमियों को दिया गया । इससे स्थानीय उत्पादकों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और अपने कारोबार को व्यापक बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कार्यशाला का एक अहम सत्र “Design Innovation for Sustainable Handloom & Handicrafts” पर हुआ । इसमें हाथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप विकसित करने, नए डिजाइन तैयार करने तथा पारंपरिक उत्पादों को अधिक आकर्षक और प्रतिस्पर्धी बनाने पर चर्चा हुआ । इसके बाद “Traditional Motifs to Contemporary Designs” विषय पर पारंपरिक डिजाइन और मोटिफ को आधुनिक स्वरूप देने की जानकारी दिया गया ।

कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों से फीडबैक एवं विमर्श लिया गया l माना जा रहा है कि यह पहल छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हाथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों को स्थानीय बाजार से आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में उपयोगी साबित होगी । साथ ही बुनकरों और कारीगरों को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ब्रांडिंग, डिजाइन, निर्यात और बाजार की नई संभावनाओं से जोड़ने पर भी मजबूत पहल माना जा रहा है ।




