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गौ रक्षा के नाम पर सतनामी समाज के जनप्रतिनिधि पूर्व सरपंच से मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी का आरोप, सतनामी समाज के सैकड़ों लोगों किया आरंग थाना का घेराव आरोपियों के खिलाफ़ बीएनएस और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज,

चमन प्रकाश कुर्रे l
एडिशनल एस पी अभिषेक झा का बयान — “कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा”
आरंग/रायपुर। आरंग क्षेत्र में गौ रक्षा के नाम पर कथित रूप से एक युवक के साथ मारपीट, जातिसूचक गाली-गलौज, सामाजिक अपमान और वीडियो वायरल किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। ग्राम गुदगुदा निवासी बालकुमार कुर्रे के साथ हुई कथित घटना के विरोध में सतनामी समाज के सैकड़ों लोग थाना आरंग पहुंच गए और आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।


सतनामी समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग गौ रक्षा की आड़ में कानून हाथ में लेकर निर्दोष ग्रामीणों को प्रताड़ित कर रहे हैं तथा क्षेत्र में भय और अराजकता का माहौल बना रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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पीड़ित बालकुमार कुर्रे, पिता बहुरसिंह कुर्रे, निवासी ग्राम गुदगुदा ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि उनका परिवार खेती-किसानी के साथ पशुपालन का कार्य करता है। उनके घर में लगभग 10 से 15 गाय और भैंसें हैं। 8 मई की देर रात चराई के बाद कुछ पशु वापस नहीं लौटे थे। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि गांव के नाले के उस पार कुछ लोगों ने पशुओं को पकड़ रखा है। सूचना मिलने पर वे अपने पशुओं की पहचान करने मौके पर पहुंचे।

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बालकुमार कुर्रे ने आरोप लगाया कि वहां पहले से पुलिस मौजूद थी और पशुओं को थाना आरंग लाया जा चुका था। जब वे अपने पशुओं को देखने पहुंचे तो वहां मौजूद खुद को गौरक्षक और गौसेवक बताने वाले कुछ लोगों ने उन्हें बिना किसी जांच-पड़ताल के गौ-तस्कर और तस्करों का सहयोगी बताकर सार्वजनिक रूप से अपमानित करना शुरू कर दिया। शिकायत में गोल्डी शर्मा निवासी रायपुर, अभिजीत शर्मा, विजय अग्रवाल सहित अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए हैं।
पीड़ित ने बताया कि पूछताछ के दौरान उन्होंने सामान्य ग्रामीण भाषा में “जानवर” शब्द का उपयोग किया, जिस पर आरोपियों ने उन्हें “नीच”, “हिंदू समाज का कलंक” जैसे अपमानजनक और जातिसूचक शब्द कहे। आरोप है कि इसके बाद धक्का-मुक्की, मारपीट और डराने-धमकाने की घटना हुई। इतना ही नहीं, पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक सहित अन्य माध्यमों में वायरल कर दिया गया, जिससे पीड़ित परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंची और पूरा परिवार मानसिक तनाव में आ गया।

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घटना की जानकारी मिलते ही सतनामी society में भारी आक्रोश फैल गया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में समाज के लोग थाना आरंग पहुंच गए। थाना परिसर में समाज के नेताओं और पदाधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में परमानंद जांगड़े, संजय चेलक, पिंटू कुर्रे, रेखलाल पात्रे, राधाकृष्ण टंडन, सतेंद्र चेलक, दिवाकर जांगड़े, शेखर नारंग, राजू मनहरे, अमर मांडले, विकास टंडन, संजय टंडन, पुरुषोत्तम सोनवानी, लक्की कोशले, प्रदीप जोशी, राजेश बारले, चुंडामणि गायकवाड़, बलराम सोनवानी, आर्यन जोशी, गणेश बांधे, टिकेश्वर गिलहरे, जितेंद्र टंडन, चंदन मांडले, ललित ढीढ़ी, लक्की डहरिया, गणेश डहरिया, संतोष गेंद्रे, जितेंद्र नारंग, विक्की टंडन, देवेंद्र मैरिसा, डोमार भारद्वाज, जीवराखन बांधे, उमेंद्र कुर्रे सहित लगभग तीन सौ से अधिक समाज के लोग उपस्थित रहे।

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समाज के वरिष्ठ नेता परमानंद जांगड़े ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि गौ रक्षा के नाम पर समाज विशेष को निशाना बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और भय का वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जांगड़े ने पुलिस प्रशासन से आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड की जांच कर कठोर कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि आरोपियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो समाज व्यापक आंदोलन करेगा।
संजय चेलक और पिंटू कुर्रे ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। यदि किसी को संदेह था तो पुलिस को सूचना देकर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी, लेकिन सार्वजनिक रूप से अपमानित करना और जातिसूचक टिप्पणी करना गंभीर अपराध है। राधाकृष्ण टंडन ने कहा कि वायरल वीडियो ने पूरे समाज को आहत किया है और इससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है।


समाज के प्रतिनिधियों ने ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन से मांग की कि आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, सोशल मीडिया में वायरल वीडियो हटाया जाए तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। समाज के लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व गौ रक्षा के नाम पर थाना और न्यायालय की भूमिका निभाने लगे हैं और निर्दोष लोगों को प्रताड़ित कर रहे हैं।


मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 115(2), 126(2), 131, 352, 351(2), 356 एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है। इसके अलावा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(10) के तहत भी प्रकरण कायम किया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार दर्ज धाराओं में गाली-गलौज, मारपीट, डराने-धमकाने, सार्वजनिक अपमान, शांति भंग करने और सामूहिक रूप से अपराध करने जैसे आरोप शामिल हैं। एससी-एसटी एक्ट के तहत जातिसूचक टिप्पणी और सामाजिक अपमान को गंभीर अपराध माना गया है।

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मामले को लेकर एडिशनल एसपी अभिषेक झा ने स्वयं संज्ञान लिया और जांच प्रारंभ कराई। सीएसपी अभिषेक झा ने समाज प्रतिनिधियों और पीड़ित परिवार को आश्वस्त करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून हाथ में लेने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
एडिशनल एसपी अभिषेक झा ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया में वायरल वीडियो की तकनीकी जांच कराई जाएगी तथा यदि किसी ने जानबूझकर समाज में तनाव फैलाने या किसी की प्रतिष्ठा धूमिल करने का प्रयास किया है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस सतर्क हो गई है। थाना आरंग और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित न हो। प्रशासन लगातार समाज के प्रतिनिधियों से संवाद कर स्थिति को शांत बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।
युवा कांग्रेसी नेता एवं सतनामी समाज के जनप्रतिनिधि सतेंद्र चेलक, राजेश बारले सहित मौजूद लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। समाज के युवाओं ने कहा कि वे न्याय मिलने तक शांत नहीं बैठेंगे।
वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी घटना को गंभीर बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। भीम आर्मी के युवा नेता ने कहा कि गौ रक्षा के नाम पर किसी निर्दोष व्यक्ति को प्रताड़ित करना कानून व्यवस्था के लिए खतरा है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

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फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई l

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