“बोल रहा अब हिंदुस्तान, मनखे–मनखे एक समान” के जयघोष के साथ सतनाम सद्भाव पदयात्रा का द्वितीय दिवस सम्पन्न

चमन प्रकाश कुर्रे |
भंडारपुरी/रायपुर। परम् पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी के पावन आशीर्वाद एवं राजागुरु धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब जी के सानिध्य में आयोजित विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा का द्वितीय दिवस उत्साह एवं श्रद्धा के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

परम् पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी की पूजा-अर्चना एवं पावन स्मरण के साथ “बोल रहा अब हिंदुस्तान, मनखे–मनखे एक समान” के गगनभेदी जयघोष के बीच रायपुर से गिरौदपुरी धाम तक आयोजित इस पदयात्रा के द्वितीय दिवस की शुरुआत सारागांव से हुई। पदयात्रा बंगोली, पिकरीडीह, माठ, खरोरा, बुड़ेरा, सिर्री, कनकी, पाड़ाभाट, भैंसा एवं भैंसमुड़ी होते हुए पावन भण्डारपुरी धाम पहुंची। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर सतनामी समाज, सर्व समाजजन, जनप्रतिनिधियों, मातृशक्तियों एवं युवा साथियों द्वारा पुष्पवर्षा, आतिशबाजी एवं आत्मीय अभिनंदन के साथ भव्य स्वागत किया गया।

इस दौरान सुसज्जित पंथी दलों की मनोहारी प्रस्तुतियां, अखाड़ा दलों का शौर्य प्रदर्शन एवं कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सामाजिक एकता और समरसता का सशक्त संदेश दिया। भण्डारपुरी धाम पहुंचकर गुरुगद्दी की विधिवत पूजा-अर्चना कर द्वितीय दिवस की पदयात्रा का श्रद्धापूर्वक विराम किया गया। राजगुरु धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब जी, राजमाता, गुरुमाता प्रवीण माता जी एवं ज्येष्ठ भ्राता श्री सोमेश बाबा जी के आशीर्वाद ने यात्रा को नई ऊर्जा एवं संकल्प प्रदान किया।

यह पदयात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक की यात्रा नहीं, बल्कि बाबा जी के सत्य, अहिंसा, समानता एवं मानवता के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रही है। व्यापक जनसमर्थन एवं उत्साह इस बात का प्रमाण है कि सामाजिक समरसता का यह अभियान जनमानस के हृदय में गहराई से स्थापित हो रहा है।

यात्रा के सुचारू संचालन के लिए पुलिस विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा बल, चिकित्सा दल एवं एंबुलेंस सेवाएं पदयात्रा के साथ निरंतर संचालित हो रही हैं, जिससे यह आयोजन अनुशासित, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हो रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर विधायकगण, विभिन्न बोर्ड, आयोग, मंडल एवं निगमों के अध्यक्षगण, अखिल भारतीय सतनाम सेना के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित रहे।
