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रायपुर से भावनात्मक जुड़ाव और संगीत यात्रा का उत्सव: संक्रांति मिलन 2026 में सौजन्या–सिरीषा की विशेष प्रस्तुति


रायपुर।
लगभग छह दशकों से रायपुर से जुड़ा एक सांस्कृतिक परिवार एक बार फिर शहर की स्मृतियों और संगीत से अपने रिश्ते को मंच पर जीवंत करने जा रहा है। सत्यनारायण मूर्ति भागवतुला ने बताया कि उनका परिवार पिछले करीब 60 वर्षों से रायपुर, छत्तीसगढ़ से भावनात्मक और सामाजिक रूप से जुड़ा हुआ है। उनके पिता स्व. श्री बी.एच. कृष्णा राव भारतीय रेल सेवा, रायपुर में अकाउंट्स ऑफिसर (गजेटेड) पद से सेवानिवृत्त हुए थे। स्वयं सत्यनारायण मूर्ति भागवतुला की शिक्षा और बचपन रायपुर में ही व्यतीत हुआ।
उन्होंने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, रायपुर में अधिकारी के रूप में सेवाएँ दीं। बाद में स्थानांतरण के पश्चात वे विशाखापट्टनम गए, जहाँ से उन्होंने सेवानिवृत्ति प्राप्त की। उनके पिता श्री कृष्णा राव जी आंध्र एसोसिएशन, रायपुर के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं तथा सांस्कृतिक समिति के चेयरमैन के रूप में भी उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया। रायपुर प्रवास के दौरान वे सांस्कृतिक गतिविधियों में अत्यंत सक्रिय रहे और सामाजिक एवं ऐतिहासिक नाटकों के कलाकार के रूप में पहचान बनाई। इसके साथ ही वे एक अच्छे गायक और लेखक भी रहे हैं। तेलुगु भाषा में उनकी अनेक कहानियाँ और कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं तथा कई पुस्तकों का विमोचन भी हुआ है। वर्तमान में वे विशाखापट्टनम में अपने पुत्र के साथ निवासरत हैं।
सत्यनारायण मूर्ति भागवतुला ने बताया कि उन्हें लेखन और संगीत का संस्कार अपने पिता से विरासत में मिला। वे स्वयं भी हिंदी और तेलुगु—दोनों भाषाओं में कहानियाँ व कविताएँ लिखते हैं। उनकी हिंदी रचनाएँ रायपुर की विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं, जबकि तेलुगु रचनाएँ विशाखापट्टनम की पत्रिकाओं में प्रकाशित होने के साथ-साथ आकाशवाणी से भी प्रसारित हुई हैं। उन्हें हिंदी और तेलुगु गायन में भी गहरी रुचि रही है।
परिवार की इस सांस्कृतिक परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है उनकी दोनों बेटियों ने। दोनों बेटियों का जन्म रायपुर में हुआ और वे वर्ष 2004 तक श्री बालाजी विद्या मंदिर की छात्राएँ रहीं। रायपुर में रहते हुए उन्होंने आंध्र एसोसिएशन द्वारा आयोजित अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया, जहाँ उन्हें श्री स्वामी जी का भरपूर प्रोत्साहन और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। बाद में आंध्र प्रदेश स्थानांतरण के पश्चात उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय संगीत रियलिटी शोज़ में भाग लिया।
सत्यनारायण मूर्ति भागवतुला की बड़ी बेटी सौजन्या, तेलुगु इंडियन आइडल – सीजन 2 की विजेता रही हैं और उन्हें सुपरहिट फ़िल्म अर्जुन रेड्डी में प्लेबैक सिंगिंग का अवसर भी मिला है। वहीं छोटी बेटी सिरीषा, हिंदी इंडियन आइडल की चर्चित प्रतिभागी रही हैं और हिंदी फ़िल्म क़ला के लोकप्रिय गीत “घोड़े पे सवार” के माध्यम से उन्होंने बॉलीवुड गायन में अपनी सशक्त पहचान बनाई है।
देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति देने के बाद, 21 वर्षों के अंतराल पर अपनी ही पाठशाला श्री बालाजी विद्या मंदिर के प्रांगण में पहला सार्वजनिक कॉन्सर्ट प्रस्तुत करने का अवसर मिलना दोनों बेटियों के लिए अत्यंत भावनात्मक क्षण है। इसके लिए उन्होंने श्री स्वामी जी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है, जो उनके पारिवारिक मित्र और शुभचिंतक हैं। उनके निरंतर, अडिग और आत्मीय सहयोग के बिना यह आयोजन संभव नहीं हो पाता।
संक्रांति मिलन 2026 के अवसर पर दिनांक 24 जनवरी, सायं 6 बजे से, श्री बालाजी विद्या मंदिर विद्यालय परिसर में तेलुगु इंडियन आइडल एवं जी सारेगामापा से जुड़े विश्व-प्रसिद्ध साई पवन म्यूजिक बैंड के साथ सौजन्या और सिरीषा की विशेष प्रस्तुति होगी। आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम केवल एक संगीत संध्या नहीं, बल्कि रायपुर से वर्षों पुराने भावनात्मक रिश्ते और समृद्ध सांस्कृतिक यात्रा का उत्सव होगा।

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