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खबर का असर : अवैध खुदाई और माफियाओं में क़ब्ज़ा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

ग्रामीणों की जनहित याचिका पर खनिज विभाग के दावों की खुली पोल

चमन प्रकाश |

रायपुर/बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ में अवैध खनन और रेत–मुरुम माफियाओं के बेलगाम होते नेटवर्क पर आखिरकार हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। रायपुर से सटे आरंग क्षेत्र के निसदा गांव में अवैध उत्खनन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सवाल उठाया है कि जब ज़मीन पर हालात बदतर हैं, तब विभागीय कागज़ों में सब कुछ “नियंत्रण में” कैसे दिखाया जा रहा है?

खनिज विभाग के दावों पर कोर्ट को भरोसा नहीं

सुनवाई के दौरान जस्टिस निखिल और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। विभाग की ओर से यह दावा किया गया कि अवैध उत्खनन पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि “केवल कार्रवाई के आंकड़े पेश कर देना पर्याप्त नहीं है, यह भी बताया जाए कि ज़मीनी हालात क्या हैं।”

7 लोगों से 30 करोड़ की वसूली, फिर भी अवैध खनन जारी?

राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि जाँच के बाद 7 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 30 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। इसके बावजूद कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि यदि कार्रवाई प्रभावी है, तो फिर नदी, खेत और ग्रामीण इलाकों में अवैध खुदाई लगातार कैसे चल रही है?

400 एकड़ कृषि भूमि पर खतरा, ग्रामीणों की आजीविका तबाह

याचिका में बताया गया है कि अवैध उत्खनन के कारण करीब 400 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि बंजर होने की कगार पर है। नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो रहा है, जिससे आसपास के गांवों में जल संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले तीन वर्षों से लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने आंखें मूंद रखी हैं।

15 गांवों के लोग प्रभावित, लेकिन प्रशासन मौन

ग्रामीणों ने कोर्ट को बताया कि उत्खनन के चलते 15 से अधिक गांवों के लोग प्रभावित हो रहे हैं। सड़कें टूट चुकी हैं, धूल और गड्ढों से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

हाईकोर्ट का साफ संदेश – लीपापोती नहीं चलेगी

कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि आगे भी अवैध उत्खनन जारी पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई में जमीनी सच्चाई पर आधारित रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल

जब कोर्ट तक को सरकारी रिपोर्ट पर भरोसा नहीं, वहीं 30 करोड़ की वसूली के बाद भी माफिया सक्रिय, तो क्या खनिज विभाग सिर्फ कागज़ों में कार्रवाई कर रहा है?

यह मामला अब सिर्फ अवैध खुदाई का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी दावों की सच्चाई का बन चुका है।

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