एक्सक्लुसिव- PHQ में अटकी DSP कल्पना वर्मा जांच रिपोर्ट, नक्सल ऑपरेशन लीक से लेकर लव-ट्रैप और करोड़ों की वसूली तक… क्यों थम गई कार्रवाई ?

चमन प्रकाश | रायपुर
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पदस्थ डीएसपी कल्पना वर्मा और होटल कारोबारी दीपक टंडन के बीच लेन-देन विवाद अब केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा। यह मामला अब पुलिस विभाग की साख, आंतरिक अनुशासन और संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों के केंद्र में आ चुका है।
करीब 1400 से अधिक पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट, जिसे एडिशनल एसपी कीर्तन राठौर द्वारा तैयार कर पुलिस मुख्यालय (PHQ) को सौंपा जा चुका है, आज तक किसी ठोस कार्रवाई में तब्दील नहीं हो पाई है। यही वजह है कि यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है और सिस्टम की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

लव-ट्रैप, ब्लैकमेलिंग और करोड़ों की वसूली के आरोप
कारोबारी दीपक टंडन ने डीएसपी कल्पना वर्मा पर आरोप लगाया है कि निजी नजदीकियों का फायदा उठाकर उसे लव-ट्रैप में फंसाया गया और मानसिक दबाव बनाकर करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपये, महंगे गहने, हीरे की अंगूठी, ब्रैसलेट और एक लग्ज़री कार वसूल की गई।
टंडन का दावा है कि जब उसने और मांगें मानने से इनकार किया, तो उसे झूठे मामलों में फंसाने और करियर तबाह करने की धमकियां दी गईं। उसने पुलिस को व्हाट्सएप चैट, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल सबूत सौंपने का भी दावा किया है। इतना ही नहीं, उस पर पत्नी से तलाक लेने का दबाव बनाए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
DSP का पलटवार: साजिश और फर्जी सबूत
वहीं दूसरी ओर, डीएसपी कल्पना वर्मा ने सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा, मनगढ़ंत और साजिशन बताया है। उनका कहना है कि प्रस्तुत किए गए सबूत छेड़छाड़ किए हुए और फर्जी हैं तथा उनकी छवि खराब करने के लिए यह पूरा षड्यंत्र रचा गया है। उन्होंने कारोबारी दीपक टंडन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही है।
नक्सल ऑपरेशन लीक का एंगल, मामला और गंभीर
मामला -उस वक्त और गंभीर मोड़ ले लेता है जब जांच रिपोर्ट में यह दावा सामने आता है कि नक्सल विरोधी ऑपरेशन से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक किए जाने की भी जांच की गई है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर अपराध बन जाता है।
सूत्रों के अनुसार, इसी बिंदु ने जांच रिपोर्ट को PHQ में ही रोक दिया है। अंदरखाने चर्चा है कि रिपोर्ट में सामने आए कुछ तथ्य ऊपर तक पहुंचने वाले नामों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन (दुबई लिंक) की ओर इशारा करते हैं, जिससे आला अधिकारी असहज नजर आ रहे हैं।
जांच पूरी, FIR शून्य — क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जांच पूरी हो चुकी है, तो अब तक कोई एफआईआर क्यों नहीं?
पुलिस सूत्र बताते हैं कि फिलहाल दोनों पक्षों के बयान लिए जा चुके हैं और प्रारंभिक जांच पूरी मानी जा रही है। बावजूद इसके, कार्रवाई के नाम पर फाइलें PHQ में धूल खा रही हैं।
इस बीच यह तथ्य भी सामने आया है कि कारोबारी दीपक टंडन के खिलाफ पहले से ही एक अलग धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी है, जिसे लेकर जांच की दिशा और मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
PHQ की चुप्पी और सिस्टम पर सवाल
करीब 1400 पन्नों की रिपोर्ट के बावजूद निर्णय की घड़ी में सिस्टम का ब्रेक पर चले जाना यह संकेत देता है कि या तो प्रभावशाली नेटवर्क का दबाव है, या फिर कार्रवाई के परिणामों का डर।
यह मामला अब केवल दो व्यक्तियों के बीच का विवाद नहीं, बल्कि कानून के राज और पुलिस की निष्पक्षता की परीक्षा बन चुका है।
वर्सन
इस पूरे मामले पर गृह विभाग की ओर से आधिकारिक बयान देते हुए कहा गया—
“अभी तक पुलिस हेडक्वाटर से डीएसपी कल्पना वर्मा के खिलाफ हुई जांच रिपोर्ट का प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। जैसे ही जांच प्रतिवेदन प्राप्त होगा, आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
— रमेश कुमार सिन्हा, आईएएस,
विशेष सचिव, गृह विभाग



