EXCLUSIVE: पलारी अस्पताल में ''जीवनदीप' राशि का घोटाला! मरीजों के इलाज के पैसे से “बाबू” कर रहा ऐश, अफसरों का खुला संरक्षण

RTI से खुलासा: जीवनदीप समिति की राशि का खुला बंदरबांट; 1.85 लाख डकार गया बाबू, बीएमओ साहब बोले- ‘एफआईआर नहीं करेंगे, वो पैसा लौटा देगा‘
चमन प्रकाश |
रायपुर/पलारी
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पलारी में भ्रष्टाचार का एक ऐसा “दीमक” लगा है, जिसने सरकारी खजाने को खोखला कर दिया है। सूचना के अधिकार (RTI) से निकले दस्तावेजों ने स्वास्थ्य विभाग के उस चेहरे को बेनकाब कर दिया है, जहाँ गरीबों के इलाज, एक्स-रे, सोनोग्राफी, लैब, पार्किंग, ओपीडी पर्ची और जांच के लिए जमा की गई राशि को एक कर्मचारी ने अपनी “जागीर” समझकर निजी ऐशो-आराम में उड़ा दिया।
हैरानी की बात यह नहीं है कि भ्रष्टाचार हुआ, बल्कि हैरानी इस बात पर है कि लाखों रुपये के इस गबन को ‘नोटिस-नोटिस’ के खेल में दबाने की कोशिश की जा रही है। स्थापना शाखा और जेडीएस (JDS) के प्रभारी सहायक ग्रेड-02 कर्मचारी हेमंत सिदार ने नियमों को जूते की नोक पर रखते हुए सरकारी धन का ऐसा “पर्सनल लोन” बनाया, जिसका न कोई रिकॉर्ड है और न ही कोई हिसाब।
कैश इन हैंड या ‘कैश इन पॉकेट‘?
वित्तीय वर्ष 2023-24 की ऑडिट रिपोर्ट ने इस घोटाले की पहली परत खोली। ऑडिट के अनुसार, दो लाख 36 हजार, छह सौ 88 रुपये ‘नगद’ (Cash in Hand) दर्शाए गए थे। यह वह पवित्र राशि थी, जो ओपीडी की पर्ची, एक्स-रे की फीस, लैब टेस्ट और पार्किंग के नाम पर एक-एक रुपया जोड़कर मरीजों से वसूली गई थी। सरकारी नियम कहता है कि यह राशि उसी दिन या अगले कार्यदिवस पर बैंक में जमा होनी चाहिए। लेकिन पलारी अस्पताल में नियम नहीं, बल्कि ‘बाबू‘ हेमंत सिदार की मर्जी चलती है।
इस कुल राशि में से एक लाख 85हजार ,सात सौ रुपये अकेले हेमंत सिदार ने अपने पास रख लिए। ताज्जुब की बात यह है कि जीवनदीप समिति की गाइडलाइन बुकलेट में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि कोई कर्मचारी इतनी बड़ी रकम सालों तक अपने रखकर ऐशो-आराम में मौज करते रहे |
भ्रष्टाचार का ‘इंस्टॉलमेंट प्लान‘: किश्तों में लौटा रहे चोरी का माल
जब RTI के जरिए मामला गरमाया और विभाग ने गर्दन फंसते देखी, तो आरोपी कर्मचारी ने किसी प्रोफेशनल अपराधी की तरह “सेटलमेंट” शुरू किया। सरकारी धन, जिसे एक बार में जमा होना था, उसे ‘किश्तों’ में वापस किया जा रहा है: 30 मई 2024: 20-20 हजार करके कुल 40,हजार रुपये जमा किए, 01 अक्टूबर 2024: 10,हजार रुपये, 06 फरवरी 2025: 10,हजार रुपये।
अभी भी एक लाख 85हजार ,सात सौ रुपये गायब हैं ! सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो 60 हजार जमा किए गए, उनका न कोई बिल, वाउचर या रसीद हैं और न कोई अस्पताल के रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों में उल्लेख है। यह सीधे तौर पर अधिकारियों की मिलीभगत से शासन की राशि पर डाका डाला गया हैं जिसे छुपाने का एक सुनियोजित तरीका इज़ात किया गया है।
चेतावनी पत्र: कार्रवाई या सिर्फ ‘खानापूर्ति‘?
दस्तावेजों की कड़ियां बताती हैं कि पूर्व खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. बी. एस. ध्रुव ने नोटिस देने की झड़ी लगा दी, लेकिन कार्रवाई के नाम पर ‘ढाक के तीन पात’ ही रहे। पहला नोटिस 28/12/2023 को लेखा दस्तावेजों को पूर्ण कर सत्यापन के संबंध में दिया गया । उसके बाद दूसरी बार 08/02/2024: अंतिम चेतावनी पत्र दिया गया । वहीं तीसरी बार 07/03/2024: फिर से ‘अंतिम’ चेतावनी पत्र जारी किया। इसके बाद भी बात नही बनी तो 18/04/2024: चौथी बार ‘अंतिम’ चेतावनी पत्र जारी खानापूर्ति किया गया ।

CP VOICE 24
जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो आरोपी हेमंत सिदार ने 18 अप्रैल 2024 को स्टाम्प विक्रेता सुरेश कनौजे से 10 रुपये का स्टाम्प पेपर खरीदा और 19 अप्रैल 2024 को तत्कालीन बीएमओ डॉ. बी.एस. ध्रुव को एक ‘शपथ पत्र’ सौंप दिया। इसमें वादा किया गया कि 5 जुलाई 2024 तक पूरी राशि जमा कर दी जाएगी। लेकिन वह तारीख आए और बीते सालों हो गए, सरकारी खजाना आज भी खाली है।
जिम्मेदारों के ‘गोल-मोल‘ बोल: सुनिए गबन पर सफाई
“निजी कारणों से पैसे रख लिए थे”

हेमंत सिदार, आरोपी कर्मचारी
“निजी कार्यों की वजह से जीवनदीप समिति की राशि को अपने पास रख लिया था। कुछ राशि किश्तों में जमा कर दी है। बाकी बची हुई राशि को चेक के माध्यम से जमा कर दूंगा।” — हेमंत सिदार, आरोपी कर्मचारी (सहायक ग्रेड-02)
“एफआईआर क्यों करें? वह लौटा देगा”

डॉ. बी.एस. ध्रुव, तत्कालीन बीएमओ
“मरीजों से वसूली गई राशि हेमंत सिदार रखते थे। हमें तीन-चार महीने बाद पता चला कि पैसा बैंक में जमा नहीं हुआ है। हमने नोटिस दिया तो उसने 60 हजार जमा किए। रही बात पुलिस में एफआईआर की, तो वह राशि वापस कर देगा, इसलिए शिकायत नहीं की है।” — डॉ. बी.एस. ध्रुव, तत्कालीन बीएमओ (जिनके कार्यकाल में गबन हुआ) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पलारी
“अब हम वसूली की कोशिश कर रहे हैं”

डॉ. पंकज वर्मा, वर्तमान बीएमओ,
इतना सब कुछ होने के बाद भी नोटिस देने का शीलशिला यही पर नही रुका वर्तमान बीएमओ डॉ. पंकज वर्मा, “प्रभार लेने के बाद जब खातों का मिलान किया गया, तो राशि कम मिली। पता चला कि हेमंत सिदार के पास जेडीएसकी राशि है । इसे वसूलने के लिए मेरे द्वारा भी चार-पाँच बार मौखिक तौर पर जेडीएस के खाते में राशि जमा करने के लिए कहा गया | जब बात से काम नही हुआ तो अब नोटिस देकर वसूली की कार्रवाई की जा रही है।”
डॉ. पंकज वर्मा, वर्तमान बीएमओ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पलारी
सबसे बड़ा सवाल: संरक्षण या मिलीभगत?
पलारी CHC के गलियारों में चर्चा है कि क्या एक छोटा कर्मचारी बिना ‘ऊपर’ के संरक्षण के इतनी बड़ी हिम्मत कर सकता है? सरकारी धन का गबन करना एक संज्ञेय अपराध (Criminal Offence) है, फिर डॉ. बी.एस. ध्रुव ने पुलिस रिपोर्ट क्यों नहीं की? क्या वे किसी को बचा रहे थे? शपथ पत्र की समय सीमा बीतने के बाद भी पलारी सामुदायिक स्वास्थय केंद्र के खंड चिकित्सा अधिकारी आखिर मौन क्यों है? बिना बिल-वाउचर के किश्तों में पैसा लेना किस सरकारी नियम के तहत आता है?
यह मामला केवल एक कर्मचारी की चोरी का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के भ्रष्टाचार में डूबे होने का प्रमाण है। जहाँ गरीबों के स्वास्थ्य के लिए आने वाला पैसा अधिकारियों की नाक के नीचे ‘पर्सनल लोन’ की तरह इस्तेमाल हो रहा है। अगर अब भी उच्च स्तरीय जांच और FIR नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस भ्रष्टाचार की जड़ें पलारी सामुदायिक स्वास्थय केंद्र सहित पूरे विभाग तक फैली हुई हैं !



