भारतमाला मुआवजा घोटाला : ईडी की दबिश शिकायतकर्ता से 7 घंटे की मैराथन पूछताछ, सौंपे बड़े सबूत

चमन प्रकाश |
रायपुर–विशाखापट्नम इकानॉमी कॉरिडोर से जुड़े भारतामाला मुआवजा घोटाले में अब जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है। करोड़ों के इस घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सीधी एंट्री के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। ईडी ने मंगलवार को मामले के शिकायतकर्ता कृष्ण कुमार साहू से करीब सात घंटे तक लगातार पूछताछ की और घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए।
मंगलवार दोपहर करीब 11.30 बजे कृष्ण कुमार साहू मोतीबाग स्थित नेताजी सुभाष स्टेडियम परिसर में ईडी कार्यालय पहुंचे। पूछताछ का सिलसिला शाम 7 बजे तक चला। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान मुआवजा वितरण, फर्जी प्रविष्टियों, भूमि रकबा हेराफेरी और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर सवाल किए गए।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने ईडी को घोटाले से जुड़े ठोस दस्तावेज और सबूत सौंपे हैं। जरूरत पड़ने पर ईडी उन्हें दोबारा तलब कर सकती है।
गौरतलब है कि ग्राम चंदना निवासी कृष्ण कुमार साहू ने भारतमाला परियोजना के तहत मुआवजा वितरण में भारी अनियमितताओं की शिकायत केंद्रीय वित्त मंत्री, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री, प्रवर्तन निदेशालय, राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW), एंटी करप्शन ब्यूरो, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से की थी।
शिकायत के बाद रायपुर के तत्कालीन कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने प्रकरण दर्ज किया। जांच में सामने आया कि मुआवजा वितरण में गड़बड़ी से शासन को करीब 40 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
इस मामले में EOW अब तक तीन तत्कालीन पटवारियों — दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती धृतलहरे को गिरफ्तार कर चुकी है। 29 अक्टूबर 2025 को हुई गिरफ्तारी के बाद हाल ही में विशेष न्यायालय रायपुर में पहला पूरक चालान भी पेश किया जा चुका है।
अब ईडी की एंट्री से मामला मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अनियमितता के एंगल से और गंभीर हो गया है। ईडी की टीम लगातार दस्तावेज, लेन-देन और संपत्तियों की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में बड़ी कार्रवाई और नए खुलासे हो सकते हैं।



