
चमन प्रकाश | रायपुर।
छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रही अवैध रेत उत्खनन की गतिविधियों पर आखिरकार प्रशासन ने सख्त और निर्णायक कदम उठा लिया है। लंबे समय से मिल रही शिकायतों, पर्यावरणीय क्षति और राजस्व हानि को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने रायपुर जिले में पहली बार ड्रोन तकनीक के जरिए रेत खदानों की सीधी और चौबीसों घंटे निगरानी व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस हाईटेक योजना के तहत शुरुआती चरण में तीन अत्याधुनिक ड्रोन कैमरे तैनात किए जाएंगे, जिनका संचालन और मॉनिटरिंग एक केंद्रीकृत कंट्रोल रूम से की जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार ड्रोन कैमरों से प्राप्त लाइव फुटेज और सटीक लोकेशन डेटा के आधार पर अवैध उत्खनन में संलिप्त लोगों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। अब किसी भी शिकायत की पुष्टि के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जैसे ही ड्रोन कैमरे किसी संदिग्ध गतिविधि को रिकॉर्ड करेंगे, खनिज विभाग की टीम को तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा और मौके पर दबिश देकर कार्रवाई की जाएगी। इससे अवैध कारोबारियों के लिए बच निकलना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।
अब तक रेत माफिया रात के अंधेरे, सुनसान इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों का फायदा उठाकर प्रशासन की पकड़ से बचते रहे हैं। कई बार सूचना मिलने के बावजूद टीम के पहुंचने से पहले ही मशीनें और वाहन वहां से हटा लिए जाते थे, जिससे ठोस सबूत जुटाना मुश्किल हो जाता था। ड्रोन निगरानी प्रणाली इस कमी को दूर करेगी और हर गतिविधि कैमरे में रिकॉर्ड होकर डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगी, जो कानूनी कार्रवाई में मजबूत आधार बनेगी।
ड्रोन से आने वाले सभी इनपुट की निगरानी रायपुर स्थित कंट्रोल सिस्टम से की जाएगी। यहां प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ लगातार स्क्रीन पर लाइव फीड की निगरानी करेगा। किसी भी असामान्य गतिविधि की पहचान होते ही संबंधित क्षेत्र की फील्ड टीम को तुरंत निर्देश दिए जाएंगे। इसके अलावा ड्रोन की मदद से दुर्गम इलाकों, नदी किनारों और रात के समय होने वाली गतिविधियों पर भी प्रभावी नजर रखी जा सकेगी, जहां परंपरागत निगरानी व्यवस्था अक्सर कमजोर साबित होती रही है।
अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना फिलहाल पायलट आधार पर लागू की जा रही है। यदि इसके परिणाम सकारात्मक रहे तो इसे भविष्य में राज्य के अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जाएगा। खासतौर पर उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां रेत और पत्थर के अवैध उत्खनन की शिकायतें सबसे अधिक सामने आती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक के उपयोग से न केवल अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। नदी तटों से अत्यधिक रेत निकासी के कारण भू-क्षरण, जलस्तर में गिरावट और जैव विविधता को नुकसान जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही थीं। निगरानी व्यवस्था मजबूत होने से इन प्रभावों पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
ड्रोन से एकत्रित सभी डेटा को डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत की गुंजाइश कम होगी। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अवैध रेत उत्खनन में संलिप्त लोगों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।

वर्सन,
ड्रोन से एकत्रित डेटा को डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत की गुंजाइश कम होगी। यह तकनीकी पहल न केवल खनन माफिया पर शिकंजा कसेगी, बल्कि आम नागरिकों का प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत करेगी। अवैध रेत उत्खन करने वालों पर तत्काल कार्यवाही करने में विभाग को डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर सहायता मिलेगी |
रजत बंसल (आईएएस), डायरेक्टर खनिज एवं भौमिकी कर्म, इंद्रावती भवन,



